सोनिया गांधी पर वंदे मातरम विवाद: कांग्रेस और सहयोगियों का समर्थन
वंदे मातरम विवाद में राजनीतिक गर्मी
नई दिल्ली। वंदे मातरम को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने राष्ट्रीय गीत का अपमान किया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, और कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) तथा डीएमके (DMK) ने एकजुट होकर सोनिया गांधी का समर्थन किया है।
क्या सोनिया गांधी को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है?
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि भाजपा अपनी घटती लोकप्रियता से ध्यान भटकाने के लिए यह विवाद खड़ा कर रही है। उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान सोनिया गांधी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की तारीफ की थी, क्योंकि वह वंदे मातरम को पूरी निष्ठा से गा रहे थे। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी गीत रोकने का प्रयास नहीं कर रही थीं, बल्कि उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मंगवाने का इशारा किया था, क्योंकि खड़गे काफी देर से खड़े थे।
टीएमसी सांसद की चुनौती
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने भाजपा को खुली चुनौती दी है। उन्होंने पूछा कि भाजपा के कितने सांसद वंदे मातरम के पूरे छह छंद गा सकते हैं? उनका कहना है कि किसी को राष्ट्रगीत न आने से वह देशविरोधी नहीं हो जाता।
डीएमके का भाजपा पर हमला
डीएमके प्रवक्ता टीके एस एलंगोवन ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा हर छोटी बात में कमियां निकालने की आदी है और सोनिया गांधी के इशारे का गलत मतलब निकाला गया है।
क्या है पूरा मामला?
15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाया जा रहा था। इसी दौरान सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बात करते और इशारा करते देखा गया। भाजपा ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम को बीच में रोकने का संकेत दिया, जिसे राष्ट्रीय गीत का अपमान बताया गया। गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस से माफी मांगने की मांग की। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी ने गीत रुकवाने के लिए नहीं, बल्कि खड़गे के लिए कुर्सी मंगाने का इशारा किया था। इसी पर विवाद बढ़ा है।