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सोमनाथ की शौर्य यात्रा: पीएम मोदी ने सांस्कृतिक धरोहर का किया जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ में भगवान शिव की पूजा की और शौर्य यात्रा में भाग लिया। उन्होंने सोमनाथ के इतिहास को विजय और पुनर्निर्माण का प्रतीक बताया। मोदी ने कहा कि सोमनाथ को कई बार नष्ट करने का प्रयास किया गया, लेकिन यह कभी नहीं मिटा। उनके संबोधन में भारत की सांस्कृतिक दृढ़ता और आस्था की शक्ति का जिक्र किया गया। जानें इस ऐतिहासिक अवसर पर पीएम मोदी ने क्या कहा।
 

प्रधानमंत्री मोदी का सोमनाथ दौरा


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के सोमनाथ में भगवान शिव की पूजा की और शौर्य यात्रा में भाग लिया। इसके बाद, उन्होंने ऐतिहासिक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लिया, जहां उन्होंने भारत की सांस्कृतिक दृढ़ता और आस्था का संदेश दिया।


सोमनाथ का इतिहास: विजय और पुनर्निर्माण

अपने ओजस्वी भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास केवल विनाश का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि सदियों तक नफरत और आतंक के इतिहास को छिपाया गया, लेकिन अब वही इतिहास गर्व के साथ सामने आया है।


सोमनाथ का अद्भुत वातावरण

पीएम मोदी ने कहा, "आज देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों लोग हमारे साथ हैं, जय सोमनाथ। यह समय और वातावरण अद्भुत है।" उन्होंने सोमनाथ के प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण का वर्णन किया, जिसमें महादेव, समुद्र की लहरें और श्रद्धालुओं की उपस्थिति शामिल हैं।


भारत की शक्ति और सोमनाथ का पुनर्निर्माण

उन्होंने कहा कि सोमनाथ को कई बार नष्ट करने का प्रयास किया गया, लेकिन न तो सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत। यह एक सुखद संयोग है कि आज सोमनाथ की स्वाभिमान यात्रा के 1,000 वर्ष पूरे हो रहे हैं।


तानाशाहों का इतिहास

पीएम मोदी ने कहा कि हजार साल पहले हमारे पूर्वजों ने महादेव की भक्ति के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि सोमनाथ को नष्ट करने वाले तानाशाह अब इतिहास के पन्नों में सिमट गए हैं।


सोमनाथ: अमर चेतना का प्रतीक

उन्होंने कहा कि गजनी से लेकर औरंगजेब तक कई आक्रांताओं ने सोमनाथ पर हमला किया, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सोमनाथ का नाम 'सोम' यानी अमृत से जुड़ा है। महादेव 'मृत्युंजय' हैं, जो काल पर विजय पाने वाले हैं।