स्विट्जरलैंड में G7 शिखर सम्मेलन से पहले बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन
जिनेवा में विरोध प्रदर्शन की स्थिति
स्विट्जरलैंड के जिनेवा में जी7 शिखर सम्मेलन से पहले हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिससे शहर की व्यवस्था हिल गई। लगभग 20,000 प्रदर्शनकारियों ने इस मार्च में भाग लिया, और स्थिति जल्दी ही तनावपूर्ण हो गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें शुरू हो गईं, और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक समूह ने संयुक्त राष्ट्र भवन और अन्य संस्थानों के बाहर अपना आक्रोश व्यक्त किया। कई लोगों ने इन संस्थाओं को वैश्विक पूंजीवाद और बहुपक्षीय सत्ता संरचनाओं का प्रतीक मानते हुए उन पर हमला किया।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क से ईंटें उखाड़कर पुलिस की ओर फेंकनी शुरू कर दीं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे शहर की सड़कों पर अफरातफरी का माहौल बन गया।
प्रदर्शनकारियों की मांगें और G7 सम्मेलन
कुछ प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया। इस दौरान, कई परिवार आसपास के इलाकों में मौजूद थे, जिन्हें इस गहमागहमी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि G7 सम्मेलन दुनिया की राजनीति और आर्थिक शक्ति के अत्यधिक केंद्रीकरण का प्रतीक है। उनका कहना है कि कुछ विकसित देशों द्वारा वैश्विक नीतियों पर प्रभाव डालना लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के खिलाफ है, और इसी कारण वे इस सम्मेलन के विरोध में सड़कों पर उतरे हैं।
जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पीएम मोदी भी पहुंचे हैं, जहां उनकी कई मुलाकातें तय हैं। यह सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन ले बेंस में आयोजित होगा, जिसमें फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका के नेता शामिल होंगे। इसके साथ ही, यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में भाग लेंगे। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
भविष्य के विरोध प्रदर्शन की संभावना
जिनेवा में हुई घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि G7 जैसे सम्मेलनों का विरोध लगातार होता रहा है, क्योंकि वहां मौजूद लोगों को लगता है कि ये सम्मेलन दुनिया भर में असंतोष पैदा करने का प्रयास करते हैं। हालांकि, अधिकांश प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण विरोध के पक्षधर थे, लेकिन कुछ समूहों की हिंसक गतिविधियों ने आंदोलन को विवादित बना दिया। इस कारण इस प्रदर्शन पर कई सवाल उठ रहे हैं, और आने वाले दिनों में G7 सम्मेलन के दौरान भी कई और विरोध प्रदर्शन देखने की संभावना है।