हरदीप पुरी की राज्यसभा में नियुक्ति पर उठे सवाल
हरदीप पुरी का स्थानांतरण
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को राज्यसभा में बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश से हटाने का निर्णय क्यों लिया गया? भाजपा के नेता यह कह रहे हैं कि हरदीप पुरी बाहरी हैं और सिख समुदाय से हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव चार महीने में होने वाले हैं। इस कारण उन्हें वहां से हटाकर मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा जा रहा है। हालांकि, यह तर्क समझ में नहीं आता। उत्तर प्रदेश में भाजपा को इस बार आठ सीटें मिली हैं, और हरदीप पुरी के होने से कोई समीकरण प्रभावित नहीं हो रहा था। उदाहरण के लिए, मुख्य विपक्षी पार्टी सपा ने गुजरात के धनराज नथवानी को राज्यसभा भेजा, न कि क्षेत्रीय या जातीय समीकरणों का ध्यान रखा।
राजनीतिक निर्णयों के पीछे की सच्चाई
इसलिए यह तर्क कि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए हरदीप पुरी को हटाया गया, सही नहीं लगता। जानकार सूत्रों के अनुसार, उनकी राजनीतिक यात्रा को समाप्त करने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका था, जिसके कारण उन्हें यूपी से राज्यसभा की टिकट नहीं दी गई थी। लेकिन बाद में कुछ घटनाएं हुईं, जिससे उन्हें टिकट मिल गई। उल्लेखनीय है कि हरदीप पुरी का नाम अमेरिका के कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की फाइलों में शामिल है। पहले उन्होंने कहा था कि वे केवल प्रतिनिधिमंडल के साथ एपस्टीन से मिले थे, लेकिन हाल ही में ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिनमें वे अकेले एपस्टीन के साथ उसके विवादास्पद कमरे में बैठे हैं। इस तस्वीर के बाद उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा की टिकट दी गई। यह तर्क भी स्वीकार्य नहीं है कि पंजाब में चुनाव हैं, इसलिए सिख चेहरा चाहिए, क्योंकि पुरी पहले पंजाब से चुनाव हार चुके हैं।