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हरमनप्रीत कौर ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर पंजाब का नाम रोशन किया

हरमनप्रीत कौर ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय महिला क्रिकेट टीम को स्वर्ण पदक दिलाया। मोगा जिले के गांव दुननेके की निवासी हरमनप्रीत की इस उपलब्धि ने उनके परिवार और पूरे पंजाब में खुशी की लहर दौड़ाई है। जानें उनके संघर्ष और सफलता की कहानी, जिसमें उन्होंने समाज की चुनौतियों का सामना करते हुए क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई।
 

पंजाब की बेटी ने किया कमाल


पंजाब समाचार: पंजाब की हरमनप्रीत कौर ने एक बार फिर अपने प्रदेश का नाम रोशन किया है। मोगा जिले के गांव दुननेके की निवासी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान के रूप में एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में श्रीलंका को 147 रनों से हराकर स्वर्ण पदक जीता।


गांव में खुशी का माहौल

इस शानदार जीत के बाद हरमनप्रीत कौर के परिवार और गांव दुननेके में खुशी की लहर दौड़ गई है। परिवार के सदस्यों ने इस उपलब्धि पर गर्व महसूस करते हुए इसे पूरे मोगा जिले के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण बताया। इससे पहले, भारत ने 2022 में भी श्रीलंका को हराकर स्वर्ण पदक जीता था।


पिता का पेशा और परिवार

हरमनप्रीत के पिता हरमिंदर सिंह भुल्लर मोगा जिला अदालत में वकील के मुंशी के रूप में कार्यरत थे। उनके परिवार में माता-पिता के अलावा दो बहनें और एक भाई भी हैं। हरमनप्रीत ने बचपन से ही क्रिकेट में गहरी रुचि दिखाई और अपने पिता के साथ मोगा के गुरु नानक कॉलेज के ग्राउंड में जाकर लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना शुरू किया। उस समय समाज ने उन्हें ताने भी दिए, लेकिन उनके पिता ने हमेशा उनका समर्थन किया।


अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफर

हरमनप्रीत कौर ने छोटे से मैदान से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया। उन्होंने 2009 में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया और 2014 में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा। 2017 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अब, 2025 में, भारतीय महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने और देश को पहला वनडे विश्व कप दिलाने के लिए उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से नवाजा गया है।