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हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं के लिए नई चुनौतियाँ: FPPAS का प्रस्ताव

हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक नई चुनौती सामने आई है, जिसमें बिजली वितरण निगमों ने FPPAS अधिभार वसूलने का प्रस्ताव रखा है। यह अधिभार 14 मई को आयोग द्वारा मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। उत्पादन लागत में वृद्धि के कारण राज्य सरकार को सब्सिडी का बोझ उठाना पड़ेगा। जानें इस प्रस्ताव के पीछे की वजह और इससे प्रभावित होने वाले उपभोक्ताओं की संख्या के बारे में।
 

हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं के लिए नई चुनौतियाँ

चंडीगढ़, 12 अप्रैल। हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबरों के बीच एक बड़ा आर्थिक झटका लगने की संभावना है। सरकार ने भले ही सीधे टैरिफ में वृद्धि नहीं की हो, लेकिन बिजली वितरण निगमों (UHBVN और DHBVN) ने पिछले दरवाजे से वसूली की योजना बना ली है। निगमों ने हरियाणा राज्य विद्युत विनियामक आयोग (HERC) से ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार (FPPAS) के तहत 47 पैसे प्रति यूनिट वसूलने की अनुमति मांगी है। चंडीगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, आयोग इस पर 14 मई को अंतिम निर्णय करेगा, जिससे प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं का मासिक बजट प्रभावित होना तय है।


FSA का नया नाम अब होगा FPPAS

हरियाणा में 2022-23 से उपभोक्ताओं से फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (FSA) वसूला जा रहा है। अब बिजली निगमों ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इसे नया नाम FPPAS देते हुए वसूली जारी रखने का प्रस्ताव रखा है। वर्तमान नियमों के अनुसार, जो परिवार महीने में 200 यूनिट से अधिक बिजली का उपयोग करते हैं, उन्हें हर यूनिट पर 47 पैसे अतिरिक्त चुकाने होंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 1 मई तक इस प्रस्ताव पर जनता की आपत्तियां और सुझाव लिए जाएंगे। चूंकि आयोग ने पहले ही मूल टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, इसलिए उम्मीद है कि वह इस अधिभार को मंजूरी दे सकता है।


उत्पादन लागत में वृद्धि से सब्सिडी का बोझ

बिजली उत्पादन की लागत में लगातार वृद्धि हो रही है, जो अब 7.35 रुपये से बढ़कर 7.48 रुपये प्रति यूनिट हो गई है। इस लागत में वृद्धि के कारण राज्य सरकार को नए वित्त वर्ष में लगभग 1089 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी देनी होगी। प्रदेश में कुल 83 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से 7 लाख किसान हैं। सरकार ने किसानों के लिए बिजली खपत का कोटा 9 हजार मिलियन यूनिट से बढ़ाकर 10 हजार मिलियन यूनिट कर दिया है। इससे सरकारी खजाने पर कुल सब्सिडी का बोझ अब 6782 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।


अधिभार लगाने के पीछे की असली वजह

बिजली उत्पादन में उपयोग होने वाले कोयले और अन्य ईंधनों की कीमतों में वैश्विक स्तर पर उतार-चढ़ाव हो रहा है। वितरण कंपनियों को मांग पूरी करने के लिए कई बार महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। बिजली कंपनियों को इस वित्तीय घाटे से बचाने के लिए नियामक आयोग उन्हें 'फ्यूल सरचार्ज' वसूलने की अनुमति देता है। हालांकि, किसानों के लिए राहत बरकरार रहेगी। ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए उन्हें पहले की तरह मात्र 10 पैसे प्रति यूनिट ही चुकाने होंगे, जबकि बाकी की बड़ी राशि सरकार सब्सिडी के जरिए बिजली निगमों को चुकाएगी।


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