हरिवंश नारायण सिंह बने राज्यसभा के उपसभापति, राजनीतिक तापमान बढ़ा
राज्यसभा में ऐतिहासिक क्षण
राज्यसभा उपसभापति: शुक्रवार को राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण घटना घटी, जिसके साथ ही राजनीतिक माहौल भी गरमाया। उपसभापति पद के लिए विपक्ष ने पहले ही अपनी असहमति जताई थी और आरोप लगाया था कि नामांकन प्रक्रिया में उनसे कोई ठोस बातचीत नहीं की गई। इस बीच, हरिवंश नारायण सिंह को पहली बार किसी मनोनीत सांसद के रूप में इस पद पर चुना गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हाल ही में मनोनीत किए गए हरिवंश नारायण सिंह ने लगातार तीसरी बार इस पद को हासिल किया है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए उनके सार्वजनिक जीवन और विचारधारा की सराहना की। उन्होंने अपने संदेश में लोकनायक जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ उनके संबंधों का भी उल्लेख किया।
हरिवंश नारायण सिंह का परिचय
कौन हैं हरिवंश नारायण सिंह?
हरिवंश नारायण सिंह का जन्म 30 जून 1956 को उत्तर प्रदेश के बलिया में हुआ। उनका पैतृक गांव सिताब दियारा है, जो जयप्रकाश नारायण का भी गांव रहा है। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। छात्र जीवन में वे जेपी आंदोलन से प्रभावित रहे और 1974 के आंदोलन में सक्रिय भाग लिया।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की और धीरे-धीरे एक प्रमुख समाचार पत्र के संपादक बने, जहां उन्होंने 25 वर्षों से अधिक समय तक कार्य किया। इस दौरान, वे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मीडिया सलाहकार भी रहे। 2014 में, नीतीश कुमार ने उन्हें जदयू की ओर से राज्यसभा भेजा, और 2018 में वे पहली बार उपसभापति बने। 2020 में, उन्होंने दोबारा इस पद पर जीत हासिल की। दिलचस्प बात यह है कि जदयू के एनडीए से अलग होने के बावजूद हरिवंश अपने पद पर बने रहे और उन्होंने संवैधानिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी। कुल मिलाकर, हरिवंश नारायण सिंह की यह उपलब्धि राज्यसभा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है, जबकि विपक्ष की नाराजगी ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है।