हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में यौन संचारित रोगों का बढ़ता खतरा
यौन संचारित रोगों की बढ़ती समस्या
शिमला। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में लगभग 20 प्रतिशत जनसंख्या, यानी हर पांचवां व्यक्ति, यौन संचारित रोगों (STD) के लक्षणों से ग्रसित है। इसका मुख्य कारण कंडोम के उपयोग में कमी और जागरूकता की कमी है। यह चौंकाने वाला तथ्य चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में किए गए एक सर्वेक्षण से सामने आया है। इस अध्ययन का संचालन हिमाचल प्रदेश के जनजातीय विकास विभाग और आईजीएमसी शिमला के सामुदायिक चिकित्सा विभाग ने किया था, जिसमें 15 से 49 वर्ष की आयु के 3,000 लोगों को शामिल किया गया था।
रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े
इस अध्ययन में पाया गया कि जनजातीय क्षेत्रों के 20 प्रतिशत लोगों में कम से कम एक STD से संबंधित लक्षण मौजूद हैं। चंबा जिला 24.2 प्रतिशत संक्रमण दर के साथ सबसे अधिक प्रभावित है, जबकि किन्नौर में यह दर 20.1 प्रतिशत और लाहौल-स्पीति में 15.7 प्रतिशत है। सर्वे में यह भी देखा गया कि केवल 24.9 प्रतिशत लोगों ने अपने अंतिम यौन संबंध के दौरान कंडोम का उपयोग किया, जबकि लगभग 33 प्रतिशत ने अपने जीवन में कभी कंडोम का इस्तेमाल नहीं किया। एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग दर भी बेहद कम है, केवल 2 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इसकी जांच कराई है।
जागरूकता की कमी
हालांकि 72 प्रतिशत लोगों ने STD के बारे में सुना है, लेकिन उनमें से केवल 46.6 प्रतिशत को यह जानकारी है कि कंडोम के उपयोग से संक्रमण को रोका जा सकता है। यह संक्रमण के बढ़ने का एक प्रमुख कारण है। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं यौन और प्रजनन स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं पर खुलकर चर्चा करने या इलाज कराने में संकोच करती हैं। जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता अभियानों की पहुंच बहुत सीमित है। जनजातीय विकास के अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा ने कहा है कि सुदूर क्षेत्रों में समय पर जांच, उपचार और जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का कार्य शुरू किया जाएगा।