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बांकीपुर उपचुनाव: त्रिकोणीय मुकाबले में खामोश मतदाता बनेगा निर्णायक

बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार त्रिकोणीय मुकाबले में बदल गया है, जिसमें भाजपा, राजद और जन सुराज पार्टी शामिल हैं। खामोश मतदाता चुनाव परिणाम में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। सभी दल अपनी जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। मतदान 30 जुलाई को होगा और मतगणना 3 अगस्त को की जाएगी। जानें किसने किस तरह से प्रचार किया और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए क्या रणनीतियाँ अपनाई गई हैं।
 

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की तैयारी


बांकीपुर: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार काफी रोचक हो गया है। भाजपा की पारंपरिक सीट अब सीधी प्रतिस्पर्धा के बजाय त्रिकोणीय हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज पार्टी सभी अपनी जीत के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।


हालांकि, सबसे बड़ा सवाल उन खामोश मतदाताओं का है, जो अपनी पसंद को स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तीनों दलों ने अपनी पूरी शक्ति झोंक दी। मतदान 30 जुलाई को होगा, और मतगणना 3 अगस्त को की जाएगी। राजनीतिक दलों का मानना है कि असली तस्वीर मतदान के बाद ही सामने आएगी।


प्रचार में प्रमुख नेता

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के तहत भाजपा और जदयू ने अपने सभी प्रमुख नेताओं को प्रचार में उतारा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, सांसद रविशंकर प्रसाद, मंत्री रामकृपाल यादव सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव प्रचार में भाग लिया। भाजपा विकास कार्यों, डबल इंजन सरकार और बांकीपुर में किए गए कार्यों को अपनी प्रमुख उपलब्धि बताकर मतदाताओं से समर्थन मांग रही है।


राजद का चुनावी अभियान

दूसरी ओर, राजद ने चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव को मैदान में उतारा। विदेश यात्रा से लौटने के बाद उन्होंने दो दिवसीय रोड शो किया, जिससे कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा और शहरी मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया। राजद रोजगार, महंगाई, छात्र आंदोलन और स्थानीय समस्याओं को अपने प्रमुख चुनावी मुद्दे बना रही है। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने चुनाव से पहले किए गए कई वादों को पूरा नहीं किया।


जन सुराज पार्टी की स्थिति

जन सुराज पार्टी खुद को तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मोहल्ला बैठकें, चाय पर चर्चा और घर-घर संपर्क अभियान के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंच बनाई। हिंद नगर, बाकरगंज, गोरिया टोली, नाला रोड और योगिया टोली जैसे क्षेत्रों में छोटे समूहों के साथ संवाद कर स्थानीय मुद्दों को चुनाव का केंद्र बनाने का प्रयास किया गया है।


निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं खामोश मतदाता

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार खामोश मतदाता चुनाव परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यही कारण है कि तीनों दल अंतिम समय तक मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार संपर्क अभियान चला रहे हैं। अब सभी की नजर 30 जुलाई के मतदान और 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिकी हुई है।