बिहार में राज्यसभा चुनाव: राजनीतिक हलचल और जीत का गणित
राज्यसभा चुनाव की घोषणा
बिहार में पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है, जिससे राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। एनडीए को चार सीटों पर मजबूत स्थिति में माना जा रहा है, जबकि पांचवीं सीट पर कड़ी प्रतिस्पर्धा की संभावना है।
मतदान की तारीख और चुनावी माहौल
चुनाव आयोग ने 16 मार्च को मतदान की तारीख निर्धारित की है। ये चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। इस चुनाव की दिलचस्पी को देखते हुए, आइए समझते हैं जीत का गणित।
बिहार राज्यसभा सीट जीतने का गणित
बिहार में राजद के प्रेम चंद गुप्ता, एनडी सिंह, जदयू के हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर के साथ आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की सीटें खाली हो रही हैं। जीत के लिए सीटों के गणित को समझना आवश्यक है। बिहार में कुल 243 विधायक हैं, इसलिए हर सीट पर जीत के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन आवश्यक है।
विधानसभा में गठबंधनों के अनुसार, एनडीए के पास वर्तमान में 202 विधायक हैं, जबकि इंडिया गठबंधन के पास केवल 35 विधायक हैं। यह स्पष्ट है कि एनडीए का दबदबा है, लेकिन सभी सीटों पर जीत के लिए उन्हें विपक्ष के तीन विधायकों की आवश्यकता होगी।
AIMIM की भूमिका
यदि हम संख्या के खेल को देखें, तो एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जो चार सीटों पर जीत दिलाने के लिए पर्याप्त हैं। लेकिन पांचवीं सीट के लिए उन्हें 41 की संख्या को पूरा करने के लिए तीन अतिरिक्त विधायकों की आवश्यकता होगी। इंडिया गठबंधन को एक सीट पर जीत के लिए 6 वोट जुटाने होंगे, जिससे कांटे की टक्कर की संभावना है।
दोनों गठबंधनों की नजर उन दलों पर है जो किसी भी गठबंधन में नहीं हैं। AIMIM के पांच विधायक, बसपा का एक विधायक और आईआईपी का विधायक इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। एनडीए के लिए AIMIM के विधायकों को अपने पक्ष में लाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जबकि तेजस्वी के लिए यह चुनाव आसान नहीं होगा। विधानसभा चुनाव में हार के बाद, एक सीट पर जीत हासिल करना उनके लिए महत्वपूर्ण है।