भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन: अमित मालवीय को नई जिम्मेदारी से हटाया गया
नई दिल्ली में भाजपा का संगठनात्मक बदलाव
नई दिल्ली: भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को पार्टी में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कई नेताओं को नई भूमिकाएं सौंपी हैं। इस बदलाव में सबसे ज्यादा चर्चा अमित मालवीय को आईटी और सोशल मीडिया विभाग से हटाने की हो रही है। पश्चिम बंगाल में पार्टी की सफलता में उनकी भूमिका के बावजूद, उन्हें नई टीम में स्थान नहीं मिला। इसके पीछे क्या कारण हैं?
बदलाव के पीछे की रणनीति
पार्टी के सूत्रों के अनुसार, मालवीय को हटाने का निर्णय अचानक नहीं लिया गया। उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद नई जिम्मेदारी लेने की इच्छा व्यक्त की थी। नई टीम के गठन के दौरान उनके उत्तराधिकारी के चयन पर चर्चा हुई और कई नामों पर विचार किया गया। यह भी बताया गया है कि नए चेहरे की तलाश में मालवीय की राय भी ली गई थी, इसलिए इसे किसी हालिया विवाद से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।
उत्तर प्रदेश का सामाजिक समीकरण
मालवीय उत्तर प्रदेश से हैं और ब्राह्मण समुदाय से संबंधित हैं। नई टीम में हरीश द्विवेदी को महासचिव बनाया गया है, जबकि स्मृति ईरानी को भी इसी पद पर नियुक्त किया गया है। रेखा वर्मा और तारिक मंसूर को उपाध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि समान सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए मालवीय को समान स्तर की दूसरी जिम्मेदारी देना कठिन था। इसके अलावा, उनकी उम्र भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष या सचिव जैसे पदों के लिए एक सीमा मानी जा रही है।
बंगाल में भूमिका के बावजूद नई जिम्मेदारी का अभाव
अमित मालवीय पिछले कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल में भाजपा के सह-प्रभारी रहे हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका को संगठन के भीतर महत्वपूर्ण माना गया। फिर भी, नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें कोई पद नहीं मिला। भाजपा के नेताओं का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी में मालवीय की भूमिका समाप्त हो गई है। उनके लिए भविष्य में कोई नई जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
नए आईटी प्रमुख की चुनौतियाँ
मालवीय के लंबे कार्यकाल में भाजपा ने डिजिटल राजनीति में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया। पार्टी के सोशल मीडिया खातों के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल पहुंच भी बढ़ी। अब दीपक म्हास्के के सामने इस विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी। खासकर युवा और Gen Z मतदाताओं तक पहुंच बनाना, विपक्ष के डिजिटल अभियानों का सामना करना और बदलते सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पार्टी का प्रभाव बनाए रखना उनकी प्रमुख चुनौतियों में शामिल होगा।