DUSU चुनाव परिणाम: ABVP ने तीन पदों पर किया कब्जा, उपाध्यक्ष बने दीपांशु शौकीन
DUSU चुनाव परिणामों का खुलासा
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के परिणामों में चार केंद्रीय पदों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने तीन पदों पर विजय प्राप्त की है, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की। शनिवार सुबह नॉर्थ कैंपस में मतगणना पूरी होने के बाद विजेताओं के नाम घोषित किए गए।
ABVP की तीन पदों पर जीत
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में ABVP ने तीन केंद्रीय पदों पर सफलता प्राप्त की। संगठन के उम्मीदवारों ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पदों पर जीत दर्ज की। सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने जीत हासिल की। चुनाव के दौरान ABVP, NSUI, वाम गठबंधन और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। मतगणना नॉर्थ कैंपस के यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में की गई। चारों केंद्रीय पदों के लिए वोटों की गिनती पूरी होने के बाद नई छात्रसंघ टीम की तस्वीर सामने आई।
यश डबास बने अध्यक्ष
प्रेसिडेंट पद के लिए ABVP के यश डबास और NSUI के विजय शंकर मीणा के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। वोटों की गिनती के कई राउंड में दोनों उम्मीदवारों के बीच बढ़त का अंतर बदलता रहा। अंततः यश डबास ने प्रेसिडेंट का पद हासिल किया। उनके साथ ABVP पैनल की रिया छाबड़ी (सचिव) और लक्ष्य राज सिंह (संयुक्त सचिव) ने भी जीत दर्ज की। इस प्रकार, ABVP ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर कब्जा कर लिया।
उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन की जीत
उपाध्यक्ष पद का परिणाम इस चुनाव में सबसे अलग रहा। निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने इस सीट पर जीत हासिल की, जिससे उन्होंने प्रमुख छात्र संगठनों के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया। चुनाव के दौरान शौकीन ने इस सीट पर लगातार मजबूत स्थिति बनाए रखी। उपलब्ध मतगणना रुझानों में भी वह काफी आगे चल रहे थे। उनकी जीत के साथ DUSU के चार केंद्रीय पदों में से एक पद निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया।
DUSU के चारों पदों की स्थिति स्पष्ट
DUSU में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव चार प्रमुख केंद्रीय पद होते हैं। इस चुनाव में इन सभी पदों के लिए विभिन्न छात्र संगठनों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भाग लिया। चुनाव में कुल 20 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया और मतदान 52 केंद्रों पर हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, इस बार मतदान प्रतिशत 40.46 रहा, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है। नतीजों के बाद अब चुने गए प्रतिनिधियों के सामने विश्वविद्यालय के छात्रों से जुड़े मुद्दों पर कार्य करने की जिम्मेदारी होगी।