गुरुग्राम दंपति का आईवीएफ विवाद: जुड़वां बच्चियों का डीएनए परीक्षण चौंकाने वाला
आईवीएफ प्रक्रिया में विवाद
नई दिल्ली: गुरुग्राम के एक दंपति, राहुल और मीनू राठौर, ने आईवीएफ तकनीक के माध्यम से माता-पिता बनने की कोशिश की, लेकिन हाल ही में एक मेडिकल जांच ने उनके जीवन में उथल-पुथल मचा दी। उन्हें पता चला कि उनकी जुड़वां बच्चियां उनकी जैविक संतान नहीं हैं। डीएनए परीक्षण में माता-पिता के आनुवंशिक मिलान की कमी के बाद मामला अदालत में पहुंच गया है। अब, अदालत के आदेश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आईवीएफ उपचार की प्रक्रिया
राहुल राठौर ने बताया कि उनकी पत्नी का आईवीएफ उपचार 2024 से एक निजी अस्पताल में चल रहा था। इस दौरान उन्हें आगे की प्रक्रिया के लिए दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित एक आईवीएफ केंद्र भेजा गया। दंपति का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में पूरी प्रक्रिया की गई और उन्हें हर चरण में आश्वासन दिया गया कि यह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप है।
जैविक नमूनों का आश्वासन
दंपति का आरोप है कि जनवरी 2025 में आवश्यक मेडिकल जांच के बाद, फरवरी में अंडाणु और शुक्राणु लिए गए और मई में भ्रूण को गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया गया। परिवार का कहना है कि अस्पताल ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया था कि पूरी प्रक्रिया में केवल उनके जैविक नमूनों का ही उपयोग किया जाएगा।
बच्चियों के जन्म के बाद का संदेह
जनवरी 2026 में मीनू ने जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। प्रारंभ में परिवार बहुत खुश था, लेकिन समय के साथ कुछ बातें सामने आईं, जिससे उन्हें संदेह हुआ। इस कारण उन्होंने बच्चियों की डीएनए जांच कराने का निर्णय लिया। जांच रिपोर्ट ने उन्हें ऐसे सवालों का सामना करने पर मजबूर कर दिया, जिनकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी।
डीएनए रिपोर्ट की चिंताएं
दंपति का दावा है कि डीएनए परीक्षण में बच्चियों का आनुवंशिक मिलान न तो मां से हुआ और न ही पिता से। उनका आरोप है कि इससे भ्रूण या नवजात शिशुओं की अदला-बदली की आशंका उत्पन्न होती है। परिवार का कहना है कि यदि ऐसा हुआ है, तो उनका जैविक बच्चा किसी अन्य व्यक्ति के पास पहुंच गया हो सकता है।
अदालत के आदेश पर एफआईआर दर्ज
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रारंभिक स्तर पर उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया। अदालत के निर्देश पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान कोई गंभीर चूक हुई थी या नहीं।