दिल्ली के कंझावला में प्रदूषण नियंत्रण कार्रवाई पर विवाद
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या
नई दिल्ली: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के मुद्दे पर कंझावला इंडस्ट्रियल एरिया में की गई कार्रवाई अब विवाद का कारण बन गई है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने लगभग 400 फैक्ट्रियों को नोटिस जारी किए हैं और तीन को सील कर दिया गया है। व्यवसायियों का आरोप है कि बिना उचित जांच के गोदामों और प्रदूषण रहित इकाइयों को भी नोटिस थमाए गए हैं, जिससे करोड़ों का व्यापार और हजारों लोगों की नौकरियां संकट में पड़ गई हैं.
फैक्ट्रियों की संख्या और नोटिस
कंझावला इंडस्ट्रियल एरिया में लगभग 800 फैक्ट्रियां और गोदाम हैं। इनमें से करीब 400 को DPCC ने प्रदूषण फैलाने के आरोप में नोटिस जारी किए हैं। तीन फैक्ट्रियों को सील भी किया गया है। यह जानकर आश्चर्य होता है कि कई गोदामों को भी नोटिस मिला है, जहां न तो उत्पादन होता है और न ही पानी या चिमनी का उपयोग किया जाता है.
गोदाम मालिकों की चिंताएं
कंझावला में गोदाम चलाने वाले विजय डबास का कहना है कि उनके परिसर में केवल सामान रखा जाता है और इसे किराए पर दिया गया है। इसके बावजूद उन्हें प्रदूषण का नोटिस मिला है। विजय का कहना है कि इस कार्रवाई से उनका व्यापार गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। गोदाम बंद होने से सप्लाई चेन में बाधा आ रही है, जिससे नुकसान करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है.
एयर फिल्टर बनाने वाली फैक्ट्री पर कार्रवाई
प्रदूषण से बचाव के लिए एयर फिल्टर बनाने वाली एक फैक्ट्री को भी नोटिस दिया गया है। फैक्ट्री के मालिक कमलेश कुमार ने बताया कि उन्होंने डेढ़ करोड़ रुपये का निवेश कर दो महीने पहले ही यूनिट शुरू की थी। पिछले 10 दिनों से फैक्ट्री बंद है। उनका कहना है कि न तो धुआं निकलता है और न ही पानी का उपयोग होता है, फिर भी कार्रवाई की गई है.
नोटिस का आधार
कंझावला इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी रोहित कुमार के अनुसार, DPCC ने बताया कि नोटिस SDM ऑफिस के सर्वे के आधार पर जारी किए गए हैं। यह सर्वे सिविल डिफेंस के लोगों द्वारा किया गया था। रोहित का कहना है कि कुछ चुनिंदा फैक्ट्रियों को छोड़कर अधिकांश यूनिट्स से न तो धुआं निकलता है और न ही प्रदूषित पानी छोड़ा जाता है.
सड़कें और प्रदूषण
व्यवसायियों का कहना है कि कंझावला इंडस्ट्रियल एरिया की अधिकांश सड़कें खराब स्थिति में हैं। कई स्थानों पर सड़कें टूटी हुई हैं, जिससे हर समय धूल उड़ती रहती है। रोहित कुमार का आरोप है कि फैक्ट्रियों से कम और सड़कों से ज्यादा प्रदूषण हो रहा है। उद्योगपतियों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है और केवल दोषी इकाइयों पर कार्रवाई की अपील की है.