दिल्ली के मजनू का टीला में कैफे और रेस्टोरेंट्स पर खतरा
मजनू का टीला में संकट
दिल्ली के नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र में स्थित मजनू का टीला, जो अपने सस्ते और स्वादिष्ट तिब्बती और एशियाई भोजन के लिए प्रसिद्ध है, अब एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। यहां के कई लोकप्रिय कैफे, बार और रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर हैं। इसका कारण दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सेफ्टी नियमों और बिल्डिंग प्लान के संबंध में उठाए गए सख्त कदम हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मजनू का टीला में बिना स्वीकृत बिल्डिंग प्लान और उचित फायर सेफ्टी व्यवस्था के चल रहे सभी कैफे और रेस्टोरेंट्स के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने कहा है कि किसी भी व्यावसायिक गतिविधि को नियमों के बिना संचालित होने की अनुमति नहीं दी जा सकती, खासकर जब यह लोगों की सुरक्षा से जुड़ा हो।
यमुना किनारे अवैध निर्माण पर सवाल
यह मामला एक याचिका के माध्यम से सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि यमुना नदी के किनारे मजनू का टीला क्षेत्र में कई बहुमंजिला इमारतें बिना कानूनी अनुमति के बनाई गई हैं। इन इमारतों का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है, जबकि इनके पास न तो उचित बिल्डिंग अप्रूवल है और न ही आवश्यक सुरक्षा उपाय।
तीन महीने में कार्रवाई का आदेश
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने याचिका का निपटारा करते हुए संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे शिकायतों की समीक्षा कर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करें। कोर्ट ने कहा कि यह कार्रवाई जल्द से जल्द की जाए और इसे तीन महीने के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाए।
DDA, MCD और फायर डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी
याचिका में यह भी मांग की गई थी कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), नगर निगम (MCD) और दिल्ली फायर सर्विस नेशनल बिल्डिंग कोड और फायर सेफ्टी नियमों को सख्ती से लागू करें। बताया गया कि कई इमारतों में तीसरी या चौथी मंजिल के बाद सीढ़ियां तक नहीं हैं और केवल छोटे, कम क्षमता वाले लिफ्ट ही मौजूद हैं, जो आपात स्थिति में खतरनाक साबित हो सकते हैं।
छात्रों की पसंदीदा जगह पर प्रभाव
सुनवाई के दौरान जस्टिस गेडेला ने मजाक में कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के आधे छात्र मजनू का टीला के कैफे में ही मिलते हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि नियमों के खिलाफ चल रही दुकानों और रेस्टोरेंट्स को हटाया जाएगा।
भविष्य की संभावनाएं
यदि नियमों का पालन नहीं किया गया, तो मजनू का टीला के कई प्रसिद्ध कैफे बंद हो सकते हैं। इससे न केवल व्यापारियों पर असर पड़ेगा, बल्कि छात्रों और खाद्य प्रेमियों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव होगा।