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दिल्ली के साकेत कोर्ट में आत्महत्या की घटना, काम के दबाव का मामला

दिल्ली के साकेत कोर्ट में एक दिव्यांग व्यक्ति, हरीश सिंह, ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा जिसमें किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जो काम के भारी दबाव और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की आवश्यकता को उजागर करती है। जानें इस घटना के पीछे के कारण और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
 

दिल्ली के साकेत कोर्ट में आत्महत्या की घटना


दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर से एक दुखद घटना की सूचना मिली है। शुक्रवार को, एक व्यक्ति ने कोर्ट की ऊपरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान हरीश सिंह के रूप में हुई है, जो एक दिव्यांग थे और नौकरी के दबावों के कारण मानसिक तनाव में थे।


हरीश ने एक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जो अदालत पर बढ़ते बोझ और वहां के कर्मचारियों की चुनौतियों को उजागर करती है।


हरीश सिंह की भूमिका

हरीश सिंह को कोर्ट के रिकॉर्ड को संभालने और जजों की सहायता के लिए नियुक्त किया गया था। उन्होंने कोर्ट की ऊपरी मंजिल पर जाकर आत्महत्या की। इस घटना के बाद कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया और कुछ समय के लिए कार्यवाही रोक दी गई। यह घटना सामान्य न्यायिक गतिविधियों के बीच हुई, जिससे कानूनी समुदाय में सदमा बढ़ गया।


सुसाइड नोट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उनके इस निर्णय के लिए किसी भी व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, काम के भारी दबाव का उल्लेख किया गया था, जो निचले स्तर के कोर्ट कर्मचारियों के बीच एक सामान्य समस्या है।


पुलिस जांच की शुरुआत

दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सुसाइड नोट का फोरेंसिक विश्लेषण करने के साथ-साथ सहकर्मियों से पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है, इसे तनाव के कारण की गई आत्महत्या माना जा रहा है। सहकर्मियों ने हरीश को मेहनती लेकिन काम के बोझ से दबा हुआ बताया है, जिसके बाद कोर्ट में बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता और काम के बोझ के प्रबंधन की मांग उठाई गई है।