दिल्ली जंतर-मंतर की नई पहचान: बैरिकेडिंग हटाने से बढ़ी आवाजाही
दिल्ली जंतर-मंतर का नया रूप
दिल्ली जंतर-मंतर: दिल्ली का जंतर-मंतर अब अपनी पुरानी छवि से अलग दिखाई देने वाला है। जहां पिछले तीन दशकों से सरकार के खिलाफ आवाजें उठती रही हैं, वहीं अब यहां आम लोगों और वाहनों की आवाजाही को सामान्य किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने यहां से कई स्तर की बैरिकेडिंग हटाना शुरू कर दिया है, जिससे सुरक्षा का पुराना घेरा भी समाप्त किया जा रहा है। इससे आसपास के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
वाहनों के लिए खुली सड़क
जंतर-मंतर पर लंबे समय से सड़क के दोनों ओर कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए जाते थे, जिससे सामान्य आवाजाही प्रभावित होती थी। अब दिल्ली पुलिस ने इन अवरोधों को हटाना शुरू कर दिया है, जिससे सड़क को आम लोगों और वाहन चालकों के लिए खोला जा रहा है। इससे जंतर-मंतर और उसके आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने वालों को पहले की तुलना में अधिक सुविधा हो सकती है।
आंदोलनों का गवाह जंतर-मंतर
जंतर-मंतर केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं है, बल्कि यह देश के कई महत्वपूर्ण आंदोलनों का गवाह भी रहा है। 1993 में इसे धरना स्थल का दर्जा मिलने के बाद से किसानों, कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने यहां अपनी मांगें उठाई हैं। कभी छोटे समूहों ने विरोध किया, तो कभी बड़ी संख्या में लोग जुटे। दिल्ली के केंद्र में स्थित होने के कारण यह स्थान लंबे समय तक अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना रहा है।
अक्टूबर में प्रदर्शन का विवाद
हाल के दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी यहां प्रदर्शन हुए थे। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य संगठनों ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराने का प्रयास किया था। अक्टूबर में प्रदर्शन की अनुमति और जंतर-मंतर तक पहुंचने को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई। 10 अक्टूबर के आसपास दिल्ली के कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई थी।
नए प्रदर्शन स्थलों की घोषणा
11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना स्थलों की सूची से हटा दिया। इसके स्थान पर तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं, जिनमें मध्य दिल्ली का रामलीला मैदान, उत्तर दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं। अब प्रदर्शन करने वाले संगठनों को इन स्थानों पर अनुमति के लिए आवेदन करना होगा। गृह मंत्रालय द्वारा गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव
जंतर-मंतर पर पहले प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के कई स्तर बनाए जाते थे। यहां पैरामिलिट्री फोर्स, क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और एंटी-राइट वाहन तैनात रहते थे। प्रदर्शनकारियों और आम लोगों के बीच बैरिकेडिंग लगाई जाती थी। अब धरना स्थल का दर्जा समाप्त होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। बैरिकेडिंग हटाने के साथ-साथ सुरक्षा बलों की तैनाती भी कम की जा रही है।