दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति: AQI 400 के पार
दिल्ली में प्रदूषण का हाल
दिल्ली में ग्रैप-2 के लागू होने के बावजूद प्रदूषण की समस्या कम होती नहीं दिख रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 331 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। राजधानी के कई क्षेत्रों में AQI 400 से ऊपर पहुंच गया है, जिससे वहां की स्थिति 'गंभीर' हो गई है।
खराब AQI वाले प्रमुख क्षेत्र
जहांगीरपुरी में सबसे खराब स्थिति देखी गई, जहां AQI 449 तक पहुंच गया। इसके अलावा, रोहिणी में 429, पंजाबी बाग में 424, अलीपुर में 413, विवेक विहार में 410, नरेला में 406 और बवाना में 403 AQI दर्ज किया गया। इन सभी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में रही।
दिल्ली के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में नरेला का AQI 406, रोहिणी का 429, जहांगीरपुरी का 449, पंजाबी बाग का 424, विवेक विहार का 410, अलीपुर का 413 और बवाना का 403 रहा। ओखला फेज-2 में AQI 352, मंदिर मार्ग में 368, मुंडका में 396 और ITO में 373 दर्ज किया गया।
AQI के पैमाने की जानकारी
AQI के मानकों के अनुसार, 0 से 50 तक की हवा 'अच्छी', 51 से 100 'संतोषजनक', 101 से 200 'मध्यम', 201 से 300 'खराब', 301 से 400 'बहुत खराब' और 401 से 500 के बीच की हवा 'गंभीर' मानी जाती है।
नोएडा में प्रदूषण की स्थिति
दिल्ली के निकट नोएडा में भी वायु गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है। मंगलवार को नोएडा के सेक्टर 62 में AQI 404 दर्ज किया गया, जो 'गंभीर' श्रेणी में आता है। सेक्टर 39 में AQI 365 और सेक्टर 150 में 343 दर्ज किया गया। सेक्टर 116 में AQI 272 रहा, जो 'खराब' श्रेणी में आता है।
ग्रैप-2 के तहत सख्त कदम
ग्रैप स्टेज-2 लागू होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकारी एजेंसियां कई अतिरिक्त कदम उठाएंगी। इसमें सड़कों की रोजाना मैकेनिकल और वैक्यूम सफाई शामिल होगी। धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी के साथ डस्ट सप्रेसेंट का छिड़काव किया जाएगा। प्रदूषण के हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए जाएंगे। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण बढ़ाया जाएगा।
इसके अलावा, निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव है। लोगों को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की सलाह दी जाएगी। जिन लोगों के काम की प्रकृति इसकी अनुमति देती है, उन्हें वर्क फ्रॉम होम करने की सलाह भी दी गई है। कोयले और लकड़ी के उपयोग पर लागू पाबंदियां भी जारी रहेंगी।