दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल की जज बदलने की याचिका खारिज की
दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला
नई दिल्ली: दिल्ली शराब नीति से संबंधित मामले में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा जज बदलने की मांग को अस्वीकार कर दिया है। केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए मामले को किसी अन्य बेंच में स्थानांतरित करने की अपील की थी।
मुख्य न्यायाधीश का स्पष्टीकरण
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा रोस्टर के अनुसार यह मामला जस्टिस शर्मा की बेंच को सौंपा गया है और इसे दूसरी बेंच में भेजने का कोई उचित कारण नहीं है।
रजिस्ट्रार जनरल की जानकारी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने 13 मार्च को एक पत्र जारी किया था, जिसमें उन आठ व्यक्तियों को जानकारी दी गई थी जिन्होंने मामले को दूसरी बेंच में स्थानांतरित करने की मांग की थी। इनमें अरविंद केजरीवाल का नाम भी शामिल था।
केजरीवाल के आरोप
11 मार्च को केजरीवाल ने एक पत्र में चिंता व्यक्त की थी कि यदि मामला जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा की बेंच में रहा, तो निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं होगी। इससे पहले, 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल सहित 22 आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया था। इस फैसले को सीबीआई ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, और इसी याचिका पर जस्टिस शर्मा की बेंच में सुनवाई चल रही है।
ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर रोक
9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए ट्रायल कोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगा दी थी, जिसमें सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की बात कही गई थी। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश में की गई कुछ टिप्पणियों को गलत बताया और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामलों की कार्यवाही को फिलहाल टालने का निर्देश दिया था।