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राजनगर एक्सटेंशन में हरीश राणा के परिवार का दर्दनाक सफर

राजनगर एक्सटेंशन में हरीश राणा के परिवार का दर्दनाक सफर जारी है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु की अनुमति दी है। हरीश के माता-पिता उनके अंतिम पलों का सामना कर रहे हैं, जबकि पड़ोसी और समाज उनके साथ खड़े हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने आर्थिक सहायता का ऐलान किया है, लेकिन माता-पिता के दिल का दर्द कम नहीं हो सकता। जानें इस कठिन समय में परिवार की स्थिति और सरकारी मदद के बारे में।
 

परिवार की उदासी


राजनगर एक्सटेंशन की राज एम्पायर सोसाइटी में एक घर में गहरा दुख छाया हुआ है। हरीश राणा के माता-पिता हर समय अपने बेटे के पास रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद, उनके पास समय बहुत कम बचा है। मां निर्मला देवी बार-बार अपने बेटे के माथे पर हाथ फेरती हैं, और उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। पिता अशोक चुपचाप उनके हाथ को थामे रहते हैं। पड़ोसी बताते हैं कि 13 साल तक बिस्तर पर पड़े रहने वाले हरीश परिवार के लिए हमेशा जीवित रहे, लेकिन अब उनका साथ केवल कुछ दिनों का रह गया है। पूरा मोहल्ला इस दुख में उनके साथ है।


अंतिम पलों का दर्द

मां निर्मला देवी दिन-रात अपने बेटे को देखती रहती हैं। कभी-कभी वे रो पड़ती हैं। पिता अशोक राणा मीडिया से बात करने से बचते हैं, लेकिन जब बोलते हैं, तो उनकी आवाज में रुखापन आ जाता है। पड़ोसी आनंद मोहन बताते हैं कि परिवार अब किसी से ज्यादा नहीं मिलता। सोसाइटी के सभी लोग इस कठिन समय में उनके साथ खड़े हैं और कहते हैं कि हरीश भले ही कोमा में थे, लेकिन घर में उनकी उपस्थिति हमेशा महसूस होती थी।


2013 का वह हादसा

रक्षाबंधन के दिन 2013 में हरीश चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिससे उन्हें सिर और कमर में गंभीर चोटें आईं। परिवार को लगा कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा, लेकिन हरीश कभी होश में नहीं आए। मेरठ मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने तीन महीने पहले रिपोर्ट दी कि उनकी स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं है। तब से परिवार इच्छामृत्यु के विकल्प पर विचार कर रहा है।


एम्स में अंतिम जांच

शुक्रवार को हरीश को एम्स दिल्ली ले जाने की योजना है। वहां उन्हें आईआरसीएस पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर, एम्स ने एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रमुख के नेतृत्व में एक मेडिकल कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी उनके स्वास्थ्य की अंतिम जांच करेगी। इस प्रक्रिया के लिए जल्द ही सर्कुलर जारी होने की संभावना है।


सरकारी सहायता का ऐलान

उत्तर प्रदेश सरकार ने हरीश राणा के परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से दस लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही परिवार के किसी सदस्य को रोजगार के लिए एक दुकान भी उपलब्ध कराई जाएगी। यह आर्थिक सहायता कुछ बोझ को कम कर सकती है, लेकिन माता-पिता के दिल के दर्द को कोई नहीं मिटा सकता। वे बस उन अंतिम पलों को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, जहां प्यार और विदाई एक साथ हैं।