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इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद स्वास्थ्य संकट

इंदौर में दूषित पानी के कारण स्वास्थ्य संकट गहरा गया है, जिसमें 21 लोगों की मौत हो चुकी है। भागीरथपुरा क्षेत्र में उल्टी-दस्त की समस्या ने कई लोगों को प्रभावित किया है। स्वास्थ्य विभाग ने 436 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया है, जिनमें से 403 को छुट्टी मिल गई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम की पाइपलाइनों में सीवेज का गंदा पानी मिल गया है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। जानें इस संकट के पीछे की पूरी कहानी।
 

इंदौर में स्वास्थ्य संकट की स्थिति


इंदौर, जो देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, अब दूषित पानी के कारण गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदे पानी के चलते कई लोगों की जान चली गई है। स्वास्थ्य विभाग इस स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।


मरीजों की संख्या में वृद्धि

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ. माधव प्रसाद हसानी के अनुसार, 29 दिसंबर से अब तक 436 मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती किया गया है। इनमें से 403 को छुट्टी मिल चुकी है, जबकि 8 मरीजों की स्थिति गंभीर बनी हुई है।


स्थानीय लोगों की चिंताएं और मौतों की जांच

मंगलवार को ओपीडी में 5 नए डायरिया के मरीज सामने आए, जो संक्रमण के खतरे को दर्शाते हैं। स्वास्थ्य टीमें क्षेत्र में सर्वेक्षण और जागरूकता अभियान चला रही हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम की पेयजल पाइपलाइनों में सीवेज का गंदा पानी मिल गया है, जिससे यह महामारी फैली।


महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की एक विशेष समिति ने 21 मौतों का ऑडिट किया और रिपोर्ट कलेक्टर शिवम वर्मा को सौंपी। रिपोर्ट में पाया गया कि 15 मौतें उल्टी-दस्त और दूषित पानी से संबंधित थीं। हालांकि, कुछ मामलों में मौत का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका।


पीड़ित परिवारों की सहायता

जिला प्रशासन ने अब तक 18 प्रभावित परिवारों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि भागीरथपुरा में हुई सभी मौतें अत्यंत दुखद हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि मौतों के कारणों का गहन विश्लेषण किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।