गिरवर सिंह तोमर: 26 साल बाद फिर से CRPF में लौटे
गिरवर सिंह तोमर की प्रेरणादायक कहानी
मुरैना जिले के गिरवर सिंह तोमर की जीवन यात्रा किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। 1991 में उन्होंने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में सिपाही के रूप में भर्ती होकर अपने करियर की शुरुआत की। लेकिन 1999 में एक छोटी सी घटना के कारण उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने साधु जीवन अपनाया। 54 वर्ष की आयु में, उन्होंने एक लंबी कानूनी लड़ाई जीतकर फिर से वही वर्दी पहन ली है, जिसे पाने के लिए उन्होंने अपनी जवानी बिताई।
साइकिल की टक्कर ने बदल दी जिंदगी
1990 के दशक के अंत में, जब गिरवर सिंह असम में तैनात थे, तब एक दिन बाजार से लौटते समय उनकी गाड़ी से एक स्थानीय नागरिक की साइकिल में हल्की टक्कर लग गई। नागरिक ने शिकायत की कि उसकी साइकिल टूट गई है। गिरवर सिंह ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें इस टक्कर का पता नहीं चला, फिर भी उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई और नौ साल की सेवा के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।
26 वर्षों का संघर्ष न्याय के लिए
गिरवर सिंह ने नौकरी जाने के बाद हार नहीं मानी और 1999 में हाईकोर्ट में अपील की। इस दौरान उन्होंने साधु बनकर आश्रमों और मंदिरों में समय बिताया, लेकिन अदालत में अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखी। 2007 में हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं के कारण मामला लंबा खींचता गया। इस दौरान उनके साथी अधिकारी पदोन्नति पाकर आगे बढ़ते रहे, जबकि वे भगवा वस्त्रों में समय बिता रहे थे।
अदालत का अंतिम निर्णय
आखिरकार, 2025 में अदालत ने उनकी बर्खास्तगी को अवैध ठहराते हुए उन्हें पुनः सेवा में बहाल करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि एक छोटी सी दुर्घटना के आधार पर किसी जवान को बर्खास्त करना उचित नहीं था। इस फैसले के साथ ही गिरवर सिंह के 26 वर्षों के संघर्ष का अंत हुआ।
साधु रूप का त्याग और बीजापुर में तैनाती
अदालत के आदेश के बाद, 25 अगस्त को गिरवर सिंह मुरैना से ट्रेन पकड़कर 26 अगस्त को छत्तीसगढ़ के बीजापुर पहुंचे। कैंप में रिपोर्ट करने से पहले, उन्होंने एक नाई की दुकान पर जाकर अपनी वर्षों पुरानी जटाएं कटवाईं और सफेद दाढ़ी को साफ कराया। भगवा वस्त्र उतारकर, वे दोपहर तक CRPF की 85वीं बटालियन में शामिल हो गए। आज उन्हें कैंपस में सम्मानपूर्वक 'बाबा' के नाम से जाना जाता है और 54 वर्ष की उम्र में वे फिर से देश की सेवा कर रहे हैं।