ट्विशा शर्मा की मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
भोपाल: ट्विशा शर्मा की मृत्यु के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें कहा गया कि इस मामले की जांच पूरी तरह से निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी होनी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की मीडिया ट्रायल या सार्वजनिक बयानबाजी से बचना आवश्यक है।
तीन न्यायाधीशों की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल थे, ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार पहले ही इस मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश कर चुकी है और अब जांच एजेंसी जल्द ही केस अपने हाथ में लेगी।
कोर्ट की चिंताएं
कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने कहा कि मामले के संबंध में जो माहौल और नैरेटिव बनाया जा रहा है, वह चिंताजनक है। विशेष रूप से उन आरोपों पर अदालत ने नाराजगी व्यक्त की, जिनमें कहा गया था कि स्थानीय प्रशासन और न्यायपालिका निष्पक्ष जांच में बाधा डाल रहे हैं, क्योंकि मृतका की सास गिरिबाला सिंह पूर्व जिला जज हैं और उनके पति वकील हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष को मीडिया में बयान देने के बजाय अपनी बात जांच एजेंसी के सामने रखनी चाहिए। अदालत ने मीडिया संस्थानों से भी अनुरोध किया कि वे इस मामले को सनसनीखेज तरीके से प्रस्तुत न करें।
सॉलिसिटर जनरल का बयान
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या कहा?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामला पहले ही सीबीआई को सौंपा जा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि मृतका की सास जांच में पूरा सहयोग नहीं कर रही हैं और लगातार मीडिया इंटरव्यू दे रही हैं। उन्होंने कहा कि जांच को प्रभावित करने वाली सार्वजनिक बयानबाजी से बचना चाहिए।
वहीं, वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने प्रारंभिक जांच में कई खामियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने एफआईआर दर्ज करने में तीन दिन की देरी और सबूतों को सुरक्षित न रखने जैसे आरोप लगाए।
परिवार के आरोप
परिजनों ने क्या लगाए आरोप?
इस मामले में परिवार ने दहेज प्रताड़ना और जांच में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मामले में दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी कराई गई है। वहीं, इस घटना के मुख्य आरोपी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह को पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव और सार्वजनिक हस्तक्षेप के निष्पक्ष तरीके से काम करने दिया जाना चाहिए।