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भोपाल में किसान आंदोलन: सरकार की घोषणाएं और किसानों की निराशा

भोपाल में किसान आंदोलन ने एक नया मोड़ लिया है, जहां सरकार ने कई घोषणाएं की हैं, लेकिन किसान संगठनों ने संतोष नहीं जताया। किसानों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगें अब भी पूरी नहीं हुई हैं। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि और ई-टोकन प्रणाली में बदलाव की घोषणा की है, लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि जब तक सभी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है।
 

किसान आंदोलन में नया मोड़


भोपाल, मध्य प्रदेश में बुधवार रात किसान आंदोलन ने एक नया मोड़ लिया। राज्य सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच लगभग तीन घंटे तक चली बैठक के बाद, जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे, तब पुलिस और किसानों के बीच थोड़ी तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन इस दौरान हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। हालाँकि, स्थिति जल्द ही सामान्य हो गई।


सरकार की महत्वपूर्ण घोषणाएं

बैठक के बाद, किसान कल्याण मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के लिए कई राहत भरे निर्णयों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग की खरीद को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर पात्र किसानों की उपज के 60 प्रतिशत तक किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस निर्णय से नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों के किसानों को सीधा लाभ होगा और यह व्यवस्था तुरंत प्रभाव से लागू होगी.


ई-टोकन व्यवस्था में बदलाव

सरकार ने किसानों की अन्य मांगों पर भी कुछ निर्णय लिए हैं। मूंग खरीद के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है, जबकि खरीद की अंतिम तारीख 10 अगस्त के बजाय 20 अगस्त निर्धारित की गई है। उर्वरक वितरण में ई-टोकन प्रणाली से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। जांच पूरी होने तक उर्वरक वितरण के लिए ई-टोकन प्रणाली को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है।


किसानों की निराशा

सरकार की घोषणाओं के बावजूद, किसान संगठनों ने संतोष व्यक्त नहीं किया। प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगें अब भी पूरी नहीं हुई हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार ने केवल आंशिक राहत देकर आंदोलन को समाप्त करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि जब तक सभी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


आंदोलन जारी रहेगा

किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे अपने आंदोलन को फिलहाल समाप्त नहीं करेंगे। दूसरी ओर, प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि आगे की बातचीत से समाधान निकल सकता है, जबकि किसान अपने रुख पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच एक और दौर की वार्ता होने की संभावना जताई जा रही है।