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भोपाल में पुलिसकर्मी के साथ साइबर ठगी का मामला, 1.96 लाख रुपये की चोरी

भोपाल में एक पुलिसकर्मी साइबर ठगों का शिकार बन गया, जिसने एक फर्जी लिंक के माध्यम से उसके बैंक खाते से 1.96 लाख रुपये चुरा लिए। यह घटना ऑनलाइन ठगी के बढ़ते खतरे को दर्शाती है। हवलदार ने तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन को सूचित किया, जिसके बाद जांच शुरू हो गई। विशेषज्ञों ने लोगों को अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचने और गोपनीय जानकारी साझा न करने की सलाह दी है। जानें इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और विशेषज्ञों की राय।
 

भोपाल में साइबर ठगी का नया मामला


भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक पुलिसकर्मी साइबर ठगों का शिकार बन गया है। कमलानगर थाने में कार्यरत हवलदार राजेंद्र बहादुर सिंह ने एक फर्जी लिंक के माध्यम से अपने बैंक खाते से लगभग 1 लाख 96 हजार रुपये गंवा दिए। यह घटना ऑनलाइन ठगी के बढ़ते खतरे को एक बार फिर उजागर करती है।


जानकारी के अनुसार, हवलदार राजेंद्र बहादुर सिंह पुलिस लाइन क्षेत्र में निवास करते हैं। उनके मोबाइल पर एक संदिग्ध लिंक भेजा गया था। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि लिंक पर क्लिक करने के बाद साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते से संबंधित जानकारी हासिल कर ली।


इसके बाद ठगों ने विभिन्न ऑनलाइन लेनदेन के माध्यम से उनके खाते से कुल 1 लाख 96 हजार रुपये निकाल लिए। जब उन्हें मोबाइल पर पैसे कटने के संदेश मिलने लगे, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ।


पुलिस की कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलते ही हवलदार ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन और संबंधित पुलिस अधिकारियों को सूचित किया। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बैंक ट्रांजेक्शन का पूरा विवरण एकत्र किया जा रहा है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रकम किन खातों में भेजी गई।


जांच एजेंसियां मोबाइल, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर साइबर अपराधियों की पहचान करने में जुटी हैं। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का क्या कहना है?


विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसलिए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए। बैंक, सरकारी विभाग या अन्य संस्थाओं के नाम से आने वाले संदिग्ध संदेशों की पहले पुष्टि करना आवश्यक है। किसी भी स्थिति में ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।


यदि किसी व्यक्ति के साथ इस तरह की ठगी होती है, तो तुरंत बैंक, साइबर हेल्पलाइन और स्थानीय पुलिस को सूचित करके खाते को सुरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए। समय पर शिकायत करने से कई मामलों में रकम को ट्रैक करने और नुकसान कम करने की संभावना बढ़ जाती है।