भोपाल में रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए चांदी के सिक्कों का फर्जीवाड़ा
चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा
भोपाल: भारतीय रेलवे में एक गंभीर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की प्रतिष्ठा को चुनौती दी है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पश्चिम मध्य रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारियों को सेवा स्मृति के रूप में दिए गए चांदी के सिक्के असली नहीं निकले। जब कर्मचारियों ने इन सिक्कों को बेचने का प्रयास किया, तब यह सच सामने आया। इस मामले की जांच अब पुलिस और रेलवे विजिलेंस द्वारा की जा रही है।
सम्मान का धोखा
पश्चिम मध्य रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारियों को जो चांदी के सिक्के सेवा के सम्मान में दिए गए थे, उन्हें यह नहीं पता था कि यह तोहफा धोखे में बदल जाएगा। जब कुछ रिटायर्ड कर्मचारियों ने सिक्कों की जांच करवाई, तो पता चला कि इनमें चांदी की मात्रा केवल 0.23 प्रतिशत है, जबकि शेष हिस्सा तांबे का है।
शिकायत दर्ज
इस घटना से दुखी रिटायर्ड अधिकारी डीके गौतम ने बजरिया थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि यह सम्मान समझा गया था, लेकिन नकली सिक्के मिलने से उन्हें ठगा हुआ महसूस हुआ। पुलिस ने उनकी शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है और रेलवे से पूरी जानकारी मांगी गई है।
फर्जीवाड़ा कैसे उजागर हुआ?
जानकारी के अनुसार, इंदौर की एक कंपनी एम.एस. वायबल डायमंड्स को 3,640 चांदी के सिक्कों का ऑर्डर दिया गया था। हर सिक्के की कीमत लगभग 2,500 रुपये निर्धारित की गई थी। कंपनी ने 3,631 सिक्के सप्लाई किए, लेकिन इनमें से अधिकांश तांबे के निकले, जिससे रेलवे को लगभग 90 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
कंपनी पर कार्रवाई
फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद रेलवे ने संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। पश्चिम मध्य रेलवे के सीपीआरओ ने बताया कि रेलवे की विजिलेंस टीम ने भी पुलिस को आवेदन दिया है। बजरिया थाना पुलिस का कहना है कि रेलवे से पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
पिछले आरोप
यह पहली बार नहीं है जब इस कंपनी का नाम रेलवे से जुड़े फर्जीवाड़े में आया है। सितंबर 2025 में उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां कर्मचारियों को दिए गए मेडल नकली पाए गए थे। उस घोटाले की राशि लगभग 30 से 40 लाख रुपये आंकी गई थी।