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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने IAS अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो IAS अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेशों की अनदेखी के चलते की गई है। अदालत ने अधिकारियों को 21 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। मामला सागर कलेक्टर कार्यालय में एक अनुभाग अधिकारी की अवमानना याचिका से जुड़ा है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के सख्त रुख के पीछे की वजह।
 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का सख्त कदम


भोपाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालती आदेशों की अनदेखी करने के मामले में दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है। यह मामला न्यायालय की अवहेलना और प्रशासनिक स्तर पर आदेशों का पालन न करने से संबंधित है।


हाईकोर्ट ने पूर्व प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल और पूर्व सागर कलेक्टर संदीप जीआर को 21 सितंबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने वारंट की तामीली की जिम्मेदारी भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर पुलिस अधीक्षक को सौंपी है। इस आदेश के बाद दोनों अधिकारियों की स्थिति गंभीर हो गई है।


मामले का विवरण

क्या है पूरा मामला?


यह मामला सागर कलेक्टर कार्यालय में अनुभाग अधिकारी शीला सेन की अवमानना याचिका से जुड़ा है। शीला सेन ने अपनी सेवा के नियमितीकरण के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।


सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2025 को राज्य सरकार और सागर कलेक्टर को निर्देश दिया था कि शीला सेन के दावे का 90 दिनों के भीतर समाधान किया जाए। लेकिन समयसीमा समाप्त होने के बाद भी आदेश का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते शीला सेन ने अवमानना याचिका दायर की।


अधिकारियों की लापरवाही

नोटिस के बाद भी नहीं हुआ ठोस पालन


सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि अवमानना याचिका में दोनों IAS अधिकारियों को विधिवत नोटिस दिया गया था, फिर भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।


अदालत के अनुसार, सागर कलेक्टर ने 3 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को एक पत्र भेजकर केवल तहसीलदार को संपर्क अधिकारी नियुक्त करने की जानकारी दी थी। इसके बाद न तो हाईकोर्ट में पैरवी के लिए अधिवक्ता की नियुक्ति की गई और न ही मूल आदेश के पालन से संबंधित कोई रिपोर्ट पेश की गई।


प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल

कोर्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था पर जताई नाराजगी


अदालत ने अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे प्रशासनिक व्यवस्था की दयनीय स्थिति बताया। कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त समय और अवसर मिलने के बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने का निर्देश दिया।


सरकारी अधिकारियों के लिए सख्त संदेश

प्रशासनिक अमले के लिए बड़ा संदेश


हाईकोर्ट का यह आदेश सरकारी अधिकारियों के लिए एक सख्त संदेश है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक आदेशों के पालन में लापरवाही या देरी को हल्के में नहीं लिया जाएगा। आदेश का अनुपालन न होने पर कोर्ट ने दंडात्मक प्रक्रिया का सहारा लिया है।


अब इस मामले में 21 सितंबर को दोनों अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति महत्वपूर्ण होगी। आगे की कार्रवाई अदालत में होने वाली सुनवाई और सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।