महाशिवरात्रि पर्व: ...गुरुवार रात्रि 11 बजे तक खुले रहेंगे महाकाल मंदिर के पट
उज्जैन, 26 फ़रवरी (हि.स.)। अवंतिका नगरी पूरी तरह से शिवमय हो गई है। महाकाल मंदिर में जहां शिवनवरात्र पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है वहीं शहरभर के शिव मंदिरों को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया है। शहर के सभी बाहरी मार्गो से हजारों श्रद्धालुओं का उज्जैन की ओर कूच हो रहा है। जिला प्रशासन ने 10 लाख श्रद्धालुओं का आगमन आंका है। शहरवासी मेहमानों के लिए पलक पावंड़े बिछा चुके हैं। समाजसेवी संस्थाएं भण्डारा कर रही है तो पुलिस और प्रशासन ने भी महाकाल मंदिर क्षेत्र में व्यापक व्यवस्थाएं की है। हर व्यवस्था चाकचौबंद हो,इसलिए कलेक्टर नीरज कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा स्वयं मानीटरिंग कर रहे हैं।
मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात महाकाल मंदिर गर्भगृह के पट भस्मार्ती के लिए खुले। इसके बाद सतत 44 घण्टे तक मंदिर के पट खुले रहेंगे और श्रद्धालु बाबा के दर्शन करेंगे। गुरूवार रात्रि 11 बजे शयन आरती के बाद पट बंद होंगे तथा अगले दिन से पूर्वानुसार क्रम प्रारंभ हो जाएगा। इधर गुरूवार को वर्ष में एक बार दोपहर 12 बजे होनेवाली भस्मार्ती होगी। इसमें पंजीकृत श्रद्धालु ही प्रवेश कर सकेंगे। इसके बाद आम श्रद्धालु पुन: शयन आरती तक दर्शन कर सकेंगे।
बुधवार को यह रहेगा मंदिर में पूजा आदि का क्रम
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष नीरज कुमार सिंह ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर गर्भगृह के पट 26 फरवरी को ढाई बजे खुले। भस्मारती उपरांत प्रात: दद्योदक आरती,भोग आरती हुई। पश्चात दोपहर 12 बजे से उज्जैन तहसील की ओर से पूजन-अभिषेक होगा। अपरांह 4 बजे होल्कर व सिंधिया स्टेट की ओर से पूजन व सायं पंचामृत पूजन होगा। इसके बाद भगवान को संध्या आरती में गर्म मीठे दूध का भोग लगाया जायेगा। इधर शासकीय पुजारी पं.घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में दोपहर में 11 ब्राम्हणों के द्वारा एकादश-एकादशनी रूद्रपाठ किया जाएगा। वहीं सायं 7 से 10 बजे तक कोटितीर्थ कुण्ड के तट पर विराजित कोटेश्वर महादेव का पूजन, सप्तधान्य अर्पण, पुष्प मुकुट श्रृंगार तथा आरती होगी।
महाअभिषेक पूजन प्रारंभ होगा रात्रि 11 बजे से
बुधवार रात्रि 11 बजे से बाबा महाकाल का महापूजन प्रारंभ होगा,जोकि 27 फरवरी को प्रात: 06 बजे तक सतत चलेगा। इस दौरान भगवान महाकालेश्वर का महाअभिषेक-पूजन चलेगा। जिसमें एकादश-एकादशनी रूद्रपाठ व विभिन्न मंत्रो के माध्यम से 11 ब्राह्मणों द्वारा महाकालेश्वर का अभिषेक किया जायेगा। उसके पश्चात भस्म लेपन, विभिन्न पाच फलों के रसो से अभिषेक, 101 लीटर दूध-31 किग्रा दही-21 किग्रा खांडसारी-21 किग्रा शहद-15 किग्रा देशी घी- गंगाजल-गुलाब जल-भाँग आदि के साथ केसर मिश्रित दूध से पंचामृत पूजन एवं अभिषेक किया जायेगा।
गुरुवार प्रात: धारण करेंगे सवा क्विंटल फूलों से बना पुष्प मुकूट
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी गुरुवार को भगवान का अभिषेक उपरांत नवीन वस्त्र और सप्तधान्य का मुखारविंद धारण करवाया जायेगा। पश्चात भगवान को सप्तधान्य अर्पित किया जाएगा, जिसमें चावल, खड़ा मूग, तिल, गेहू, जौ, साल, खड़ा उड़द सम्मिलित रहेगें। मंदिर के पुजारियो द्वारा भगवान का श्रृंगार कर पुष्प मुकुट बांधा जाएगा। भगवान को चंद्र मुकुट, छत्र, त्रिपुंड व अन्य आभूषणों से श्रृंगारित किया जायेगा। भगवान पर न्योछावर नेग स्वरुप चांदी का सिक्का व बिल्वपत्र अर्पित किए जाएंगे। भगवान की आरती होकर विभिन्न मिष्ठान्न, फल, पंच मेवा आदि का भोग अर्पित किया जाएगा।
गुरुवार दोपहर में होगी भस्मार्ती
गुरुवार को वर्ष में एक बार दोपहर 12 बजे होने वाली भस्मार्ती होगी। भस्मार्ती के बाद भोग आरती होगी व शिवनवरात्रि का पारणा किया जायेगा। सायं पूजन, सायं आरती व शयन आरती के बाद भगवान महाकालेश्वर के पट 44 घण्टे बाद मंगल होगे।
हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल