चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव: टिकट बंटवारे की तैयारियां तेज
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव की तैयारी
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के लिए वार्डों के आरक्षण की घोषणा के बाद राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आ गई है। 35 वार्डों में से 16 आरक्षित और 19 सामान्य श्रेणी में रखे गए हैं, जिससे बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवार सक्रिय हो गए हैं। मौजूदा पार्षद, पूर्व पार्षद, पार्टी के पदाधिकारी, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के सदस्य और चुनाव की तैयारी कर रहे नेता पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से संपर्क बढ़ा रहे हैं।
आरक्षण का प्रभाव
आरक्षण की स्थिति में बदलाव ने कई मौजूदा पार्षदों के लिए चुनावी समीकरण को बदल दिया है। जो उम्मीदवार किसी विशेष वार्ड से चुनाव लड़ने की योजना बना रहे थे, उन्हें अब किसी अन्य वार्ड पर विचार करना पड़ सकता है, यदि उनका मूल वार्ड आरक्षित हो गया है। इसके विपरीत, कुछ उम्मीदवारों के लिए यह आरक्षण फायदेमंद साबित हुआ है, जिससे टिकट पाने के लिए लॉबिंग तेज हो गई है।
टिकट का चयन सर्वेक्षण के आधार पर
इस बार, बीजेपी, कांग्रेस और AAP जीतने की संभावनाओं वाले उम्मीदवारों की पहचान के लिए सर्वेक्षण और स्थानीय फीडबैक को प्राथमिकता दे रहे हैं। संभावित उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनकी लोकप्रियता, ज़मीनी स्तर पर मौजूदगी, पार्टी के साथ सक्रिय जुड़ाव और स्थानीय स्वीकार्यता के आधार पर किया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि टिकट उन नेताओं को दिए जाएंगे जो पार्टी के प्रति वफादार रहे हैं, और उम्मीदवार का चयन सर्वेक्षण के नतीजों के आधार पर होगा।
बीजेपी में प्रतिस्पर्धा
बीजेपी में टिकट की दौड़ में मौजूदा पार्षद, अनुभवी कार्यकर्ता, मंडल पदाधिकारी और नए चेहरे शामिल हैं। महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों में, कई मौजूदा पार्षद अपनी महिला परिवार के सदस्यों को चुनावी मैदान में उतारने की योजना बना रहे हैं। उदाहरण के लिए, दमनप्रीत के वार्ड के महिलाओं के लिए आरक्षित होने के बाद उनकी पत्नी को चुनाव लड़ाने की चर्चा हो रही है।
महेश इंदर सिद्धू का वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाने के कारण, उन्हें किसी दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने का विकल्प मिल सकता है। सिद्धू की उम्मीदवारी पर सभी की नज़रें होंगी, जिन्होंने लगातार दो चुनाव जीते हैं। जसमनप्रीत और रामचंद्र यादव जैसे अन्य नेताओं को भी नए वार्डों में राजनीतिक ज़मीन तलाशनी पड़ सकती है।
कांग्रेस की चुनौतियाँ
कांग्रेस के सामने अनुभवी संगठनात्मक नेताओं और नए उम्मीदवारों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। टिकट बंटवारे के बाद संभावित असंतोष और बगावत को रोकना भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होगा। इस बार दविंदर सिंह बबला खुद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि यदविंदर मेहता की पत्नी को फिर से उम्मीदवार बनाने की चर्चा है। इसी सीट के लिए राजबाला मलिक के नाम पर भी विचार किया जा रहा है।
AAP की चुनौती
आम आदमी पार्टी (AAP) ने 2021 में अपने पहले म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में 14 सीटें जीती थीं। इस बार पार्टी नए और युवा चेहरों को मौका देने की योजना बना रही है। साथ ही, पिछले चुनाव के बाद नेताओं के पाला बदलने से बदले राजनीतिक हालात भी महत्वपूर्ण होंगे। AAP से कांग्रेस में शामिल हुए कुछ पार्षदों को शायद दूसरे वार्डों में जाना पड़े, क्योंकि उनके पुराने वार्ड महिलाओं या अनुसूचित जातियों (SC) के लिए आरक्षित हो गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल टिकट बंटवारे के बाद उम्मीदवारों के रुख को लेकर है। यदि किसी उम्मीदवार को टिकट नहीं मिलता है और वह निर्दलीय चुनाव लड़ता है या किसी दूसरी पार्टी में शामिल होता है, तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। इसलिए पार्टियां बगावत की संभावना और बागी उम्मीदवारों के प्रभाव का आकलन कर रही हैं। आने वाले दिनों में चंडीगढ़ की राजनीति में वार्ड के समीकरणों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण टिकट बंटवारे का गणित होगा।