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चंडीगढ़ प्रशासन की नई योजना: सोलर पावर प्लांट के शुल्क में राहत

चंडीगढ़ प्रशासन ने सरकारी कर्मचारियों के लिए सोलर पावर प्लांट के मासिक शुल्क में राहत देने की योजना बनाई है। नई व्यवस्था के तहत, जो कर्मचारी सोलर ऊर्जा का उपयोग नहीं करना चाहते, उन्हें अनिवार्य शुल्क नहीं देना पड़ेगा। इसके अलावा, प्रशासन ने 2030 तक शहर को कार्बन मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। जानें इस नई योजना के बारे में और इसके संभावित लाभों के बारे में।
 

चंडीगढ़ प्रशासन की नई पहल


चंडीगढ़: चंडीगढ़ प्रशासन सरकारी कर्मचारियों को एक महत्वपूर्ण राहत देने की योजना बना रहा है। प्रधानमंत्री सूर्य योजना के तहत सरकारी आवासों की छतों पर स्थापित सोलर पावर प्लांट के मासिक शुल्क को लेकर एक नया प्रस्ताव तैयार किया गया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो जो कर्मचारी सोलर ऊर्जा का उपयोग नहीं करना चाहेंगे, उन्हें हर महीने 900 रुपये का अनिवार्य शुल्क नहीं देना पड़ेगा।


वर्तमान शुल्क व्यवस्था

वर्तमान में, तीन किलोवाट क्षमता वाले सोलर पावर प्लांट के लिए कर्मचारियों से प्रति किलोवाट 300 रुपये, यानी कुल 900 रुपये मासिक शुल्क लिया जाता है। वहीं, छह किलोवाट क्षमता वाले प्लांट के लिए यह शुल्क 1800 रुपये है। कई कर्मचारियों ने शिकायत की है कि वे सोलर प्लांट से उत्पन्न पूरी बिजली का उपयोग नहीं कर पाते, फिर भी उन्हें हर महीने यह शुल्क चुकाना पड़ता है।


नई व्यवस्था के लाभ

नई व्यवस्था का विवरण


नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी सोलर ऊर्जा का उपयोग नहीं करना चाहता है, तो उससे मासिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऐसे कर्मचारी केवल अपनी वास्तविक बिजली खपत के अनुसार बिल का भुगतान करेंगे। सोलर प्लांट से उत्पन्न बिजली सीधे ग्रिड में जाएगी, जिससे प्रशासन को राजस्व प्राप्त होगा।


जो कर्मचारी सोलर बिजली का उपयोग जारी रखना चाहेंगे, उनसे पहले की तरह शुल्क लिया जाएगा। प्रशासन की मंजूरी के बाद इस प्रस्ताव को लागू किया जाएगा, और अगले महीने इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।


सोलर प्लांट का खर्च

खर्च का विवरण


सरकारी आवासों पर सोलर प्लांट लगाने का पूरा खर्च प्रशासन द्वारा वहन किया जा रहा है। इसके विपरीत, निजी आवासों पर सोलर प्लांट लगाने का खर्च संबंधित मालिक को उठाना पड़ता है। पिछले छह महीनों से चंडीगढ़ में बिजली का बिल हर महीने जारी किया जा रहा है, जबकि पहले यह हर दो महीने में आता था।


कुछ कर्मचारियों ने यह भी मांग की है कि उनकी आवश्यकता से अधिक बनने वाली सोलर बिजली का लाभ उन्हें भी मिलना चाहिए और अतिरिक्त बिजली को उनके अगले बिल में समायोजित किया जाना चाहिए। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सोलर प्लांट का उपयोग न करने वाले कर्मचारियों से जबरन शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।


लक्ष्य और भविष्य की योजनाएं

लक्ष्य की जानकारी


चंडीगढ़ प्रशासन ने 2030 तक शहर को देश का पहला कार्बन मुक्त शहर बनाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में अब तक शहर के 6200 सरकारी आवासों में से 5400 पर सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। लगभग 818 आवासों पर पेड़ों की बाधा या अन्य तकनीकी कारणों से सोलर प्लांट नहीं लगाए जा सके हैं। सोलर रूफटॉप लगाने के लिए न्यूनतम दो किलोवाट का स्वीकृत बिजली लोड होना आवश्यक है।