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चंडीगढ़ में न्यायिक सुविधाओं के विस्तार पर उठे सवाल

चंडीगढ़ में अदालतों के बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। केंद्र सरकार ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने इस दिशा में कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है, जिससे वित्तीय सहायता भी नहीं मिल सकी। इस मुद्दे पर सांसद मनीष तिवारी ने सरकार से जानकारी मांगी है। क्या चंडीगढ़ में न्यायिक सुविधाओं का विस्तार संभव है? जानिए पूरी कहानी में।
 

चंडीगढ़: अदालतों के बुनियादी ढांचे की स्थिति


चंडीगढ़: चंडीगढ़ में अदालतों के बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने जानकारी दी कि चंडीगढ़ प्रशासन ने न्यायिक आधारभूत संरचना के लिए न तो कोई प्रस्ताव प्रस्तुत किया है और न ही इस मद में केंद्र से कोई वित्तीय सहायता प्राप्त की है। इस जानकारी के बाद शहर में न्यायिक सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा तेज हो गई है।


यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अदालतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसके बावजूद, न्यायिक सुविधाओं के विस्तार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने से सवाल उठ रहे हैं।


केंद्र सरकार का दृष्टिकोण

लोकसभा में चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि जिला और अधीनस्थ अदालतों के लिए कोर्ट हॉल, न्यायाधीशों के आवास, वकीलों के चैंबर और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार केवल केंद्र प्रायोजित योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करती है।


सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में 85 न्यायाधीशों के स्वीकृत पद हैं, जबकि वहां केवल 69 कोर्ट हॉल उपलब्ध हैं। हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के लिए 64 सरकारी आवास और 131 अधिवक्ता चैंबर मौजूद हैं।


चंडीगढ़ की जिला अदालत की सुविधाएं

चंडीगढ़ की जिला अदालत में 30 न्यायिक अधिकारियों के लिए 31 कोर्ट हॉल, 29 आवास और 440 अधिवक्ता चैंबर उपलब्ध हैं। पिछले पांच वर्षों में हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के लिए तीन नए आवास बनाए गए हैं, लेकिन जिला और अधीनस्थ अदालतों में केंद्र प्रायोजित योजना के तहत कोई नया आधारभूत ढांचा विकसित नहीं किया गया है।


सांसद मनीष तिवारी ने सरकार से यह भी पूछा था कि न्यायिक ढांचे के विकास के लिए क्या योजनाएं बनाई गई हैं और केंद्र से अब तक कितना फंड मिला है। सरकार के उत्तर से स्पष्ट हुआ कि चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं भेजे जाने के कारण इस दिशा में केंद्र से वित्तीय सहायता भी नहीं मिल सकी।