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जालंधर के अभिषेक गुप्ता की प्रेरणादायक कारोबारी यात्रा

जालंधर के अभिषेक गुप्ता की कहानी एक प्रेरणादायक उद्यमिता की मिसाल है। महज 15 साल की उम्र में अपने पिता के व्यवसाय में कदम रखने वाले अभिषेक ने कठिनाइयों का सामना करते हुए अपने परिवार के कारोबार को आगे बढ़ाया। पिता की सीख और निरंतर प्रयासों के साथ, उन्होंने गुणवत्ता और नवाचार पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे उनकी कंपनी ने सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ। जानें कैसे अभिषेक ने असफलताओं को अवसरों में बदला और आज एक सफल उद्यमी बने।
 

जालंधर में युवा उद्यमिता की कहानी


जालंधर: सफलता की यात्रा हमेशा सरल नहीं होती। कई बार यह उस उम्र में शुरू होती है, जब बच्चे अपने भविष्य के बारे में सोचने भी नहीं लगते। जालंधर के अभिषेक गुप्ता की कहानी भी इसी तरह की है। केवल 15 वर्ष की आयु में, उन्होंने अपने पिता अनूप गुप्ता के व्यवसाय में मदद करना शुरू कर दिया। ग्राहकों से बातचीत करने और उनकी आवश्यकताओं को समझने का पहला पाठ उन्हें अपने पिता के साथ काम करते हुए मिला।


पारिवारिक जिम्मेदारियों का सामना

समय के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ीं। 2012 में पिता के निधन के बाद, अभिषेक और उनके भाई सलिल गुप्ता को पारिवारिक व्यवसाय संभालने की चुनौती का सामना करना पड़ा। दोनों भाइयों ने अपने पिता से मिली शिक्षा को आधार बनाकर व्यवसाय को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। आज उनकी कंपनी, केके नेट्स, क्रिकेट नेट्स, खेल वस्त्र, बैट और अन्य खेल उत्पादों का निर्माण करती है, जिनकी पहुंच देश के विभिन्न हिस्सों में है।


शिक्षा और अनुभव का संगम

अभिषेक ने दयानंद मॉडल स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और डीएवी कॉलेज से बीकॉम किया। पढ़ाई के साथ-साथ, उन्होंने अपने व्यवसायिक अनुभव को भी बढ़ाया। पिता के साथ काम करते हुए, उन्होंने ग्राहकों की आवश्यकताओं, ऑर्डर प्रक्रिया और बाजार की समझ विकसित की। बाद में, व्यवसाय को बढ़ाने के लिए उन्होंने विभिन्न राज्यों में जाकर ग्राहकों से सीधे संपर्क किया, जिससे व्यवसाय का विस्तार हुआ।


गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित

दोनों भाइयों ने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए केवल बिक्री पर निर्भर रहने के बजाय गुणवत्ता और नवाचार पर ध्यान दिया। खेल बाजार में अपनी पहचान बनाने के लिए, उन्होंने समय के साथ अपने उत्पादों में बदलाव किए। अभिषेक के अनुसार, विभिन्न राज्यों में उत्पादों की पहुंच के लिए मार्केटिंग और बिक्री पर जोर दिया गया। खेल प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाकर उत्पादों को ग्राहकों के सामने रखा गया, जिससे नए अवसर प्राप्त हुए।


असफलता से सीखना

व्यवसाय में हर मुलाकात का परिणाम ऑर्डर के रूप में नहीं होता। कई बार ग्राहकों से ऑर्डर नहीं मिलने पर भी, दोनों भाइयों ने प्रयास जारी रखा। अभिषेक का मानना है कि एक असफल प्रयास के बाद रुक जाना सही नहीं है। इसी सोच के साथ, वे अगले दिन नए उत्साह के साथ ग्राहकों से मिलने निकलते हैं। लगातार प्रयास की यह आदत धीरे-धीरे उनके व्यवसाय का हिस्सा बन गई।


पिता की सीख का महत्व

अभिषेक बताते हैं कि उनके पिता, स्वर्गीय अनूप गुप्ता ने उन्हें सच्चाई से काम करने और गुणवत्ता से समझौता न करने की शिक्षा दी थी। दोनों भाइयों ने इन सिद्धांतों को अपने व्यवसाय में बनाए रखा है। आज ऑनलाइन माध्यम से भी ऑर्डर मिल रहे हैं और खेल प्रदर्शनियों के जरिए नए ग्राहकों तक पहुंच बन रही है। व्यवसाय के अलावा, अभिषेक विभिन्न खेल संगठनों में भी सक्रिय हैं। पिता की सीख और निरंतर मेहनत उनकी कारोबारी यात्रा की पहचान बनी हुई है।