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जीरकपुर में रियल एस्टेट खरीदारों को मिली राहत, रेरा ने बिल्डर पर लगाया जुर्माना

जीरकपुर के रियल एस्टेट बाजार में एक खरीदार को राहत मिली है, जब पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने बिल्डर के खिलाफ सख्त आदेश जारी किया। खरीदार ने समय पर कब्जा न मिलने की शिकायत की थी, जिसके बाद रेरा ने बिल्डर को ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया। यह निर्णय रियल एस्टेट क्षेत्र में खरीदारों के अधिकारों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
 

जीरकपुर और चंडीगढ़ के रियल एस्टेट में महत्वपूर्ण विकास


चंडीगढ़ और जीरकपुर के रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। एक खरीदार, जो लंबे समय से अपने फ्लैट के कब्जे का इंतजार कर रहा था, को अब राहत मिली है। पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने बिल्डर के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। रेरा के इस निर्णय ने उन हजारों घर खरीदारों को भी आशा दी है, जो समय पर कब्जा न मिलने की समस्या का सामना कर रहे हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जो बिल्डर निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं करेंगे, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा और खरीदारों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।


खरीदार की शिकायत पर रेरा की कार्रवाई

यह मामला जीरकपुर स्थित 'द हर्मिटेज पार्क फेज-2' परियोजना से संबंधित है। शिकायतकर्ता हिमांशु कुमार ने रेरा में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने टावर-5ए की 11वीं मंजिल पर 4-बीएचके फ्लैट बुक किया था। फ्लैट की कुल कीमत 74.50 लाख रुपये निर्धारित की गई थी, जिसमें से उन्होंने 39.11 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। समझौते के अनुसार, उन्हें मार्च 2023 तक कब्जा मिलना था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी फ्लैट नहीं सौंपा गया।


निर्माण में देरी और आवश्यक प्रमाणपत्रों की कमी

सुनवाई के दौरान रेरा ने पाया कि बिल्डर कंपनी समय पर निर्माण कार्य पूरा नहीं कर पाई। इसके अलावा, आवश्यक आक्यूपेशन और कम्प्लीशन सर्टिफिकेट भी प्राप्त नहीं किए गए थे। प्राधिकरण ने कहा कि रेरा अधिनियम की धारा 18 के तहत खरीदार को देरी के लिए ब्याज प्राप्त करने का कानूनी अधिकार है। इसी आधार पर बिल्डर को जिम्मेदार ठहराया गया।


बिल्डर को ब्याज का भुगतान करने का आदेश

रेरा के चेयरमैन आर.के. गोयल की पीठ ने बिल्डर कंपनी पैराडाइम बिजनेस वेंचर को निर्देश दिया कि वह खरीदार को देरी के लिए 10.80 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज का भुगतान करे। प्राधिकरण ने 31 मई 2026 तक देय ब्याज की राशि 13,37,714 रुपये निर्धारित की है। इसके अलावा, 1 जून 2026 से वास्तविक कब्जा मिलने तक 35,203 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा।


भुगतान न करने पर वसूली की प्रक्रिया

रेरा ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि 90 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो राशि की वसूली भू-राजस्व बकाया की तरह की जाएगी। इसके लिए रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर राजस्व अधिकारियों के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, बिल्डर को पहले खरीदार के ब्याज का भुगतान या समायोजन करना होगा, उसके बाद ही किसी बकाया राशि की मांग की जा सकेगी। इस निर्णय को रियल एस्टेट क्षेत्र में खरीदारों के अधिकारों को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।