पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में वकीलों के आंदोलन का स्थगन
महत्वपूर्ण बैठक के बाद वकीलों का निर्णय
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के परिणामस्वरूप वकीलों के आंदोलन को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया गया है। जॉइंट एक्शन कमेटी ने 'नो वर्क' आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की अदालतों में 3 अगस्त से सामान्य कार्यवाही फिर से शुरू होगी।
बैठक में हुई सहमति
30 जुलाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों के साथ जॉइंट एक्शन कमेटी की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की विभिन्न बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि 'नो वर्क' आंदोलन को स्थगित किया जाए, ताकि अदालतों का नियमित कार्य फिर से शुरू हो सके और लंबित मामलों की सुनवाई पर कोई असर न पड़े।
LADC योजना पर उठे सवाल
बैठक के दौरान, जॉइंट एक्शन कमेटी ने LADC यानी लीगल एड डिफेंस काउंसिल स्कीम को वापस लेने की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह विषय NALSA के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत ने आश्वासन दिया कि यदि इस योजना के लागू होने से किसी पक्ष को कठिनाई होती है, तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही, बार एसोसिएशनों के सुझावों पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा।
आगे की रणनीति पर चर्चा
बार एसोसिएशनों ने बैठक में भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कराने का अनुरोध किया, ताकि वे अपनी आपत्तियां और सुझाव सीधे उनके सामने रख सकें। हाईकोर्ट ने इस दिशा में प्रयास करने का आश्वासन दिया। संयुक्त बयान में कहा गया कि 3 अगस्त 2026 से वकील काम पर लौटेंगे, जबकि आंदोलन को आगे जारी रखने का अंतिम निर्णय मुख्य न्यायाधीश के साथ प्रस्तावित बैठक के बाद सभी पक्ष मिलकर करेंगे।