पंजाब में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 14,100 महिला उद्यमियों का सम्मान
महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में कदम
चंडीगढ़: भगवंत मान की सरकार के तहत पंजाब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (पीएसआरएलएम) 18 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन बड़े पैमाने पर कर रही है। इस अवसर पर, राज्य सरकार 14,100 महिला उद्यमियों को सम्मानित करेगी। समारोह में 100 उत्कृष्ट उद्यमियों को 25,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि स्वयं सहायता समूहों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों की दर 18 प्रतिशत से घटकर 2.16 प्रतिशत हो गई है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने इस संबंध में समारोहों की योजना की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने स्वयं सहायता समूहों का विस्तार किया है और ग्रामीण महिलाओं की स्थिति को मजबूत किया है।
मंत्री ने बताया, "हर विधानसभा क्षेत्र से 100 महिला उद्यमियों को पुरस्कार दिए जाएंगे, जिससे कुल 11,700 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा, 23 जिलों से 2,300 और प्रत्येक जिले से 100 महिला उद्यमियों को भी सम्मानित किया जाएगा। राज्य स्तर पर 100 शीर्ष महिला उद्यमियों का चयन किया जाएगा, जिन्हें 25,000 रुपये का पुरस्कार मिलेगा।"
पंजाब सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा, "वर्ष 2022 से 2026 के बीच 28,734 स्वयं सहायता समूह स्थापित किए गए हैं, जबकि 2011 से 2022 के बीच केवल 29,053 समूह बने थे। इसी तरह, चार वर्षों में 2,90,213 नए सदस्य शामिल हुए हैं।"
संस्थागत विस्तार पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "2022 से 2026 के बीच 2,427 ग्राम संस्थाएं बनाई गई हैं, जबकि 2011 से 2022 के बीच 1,806 संस्थाएं बनी थीं।"
वित्तीय सहायता के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा, "2022 से 2026 के बीच 84.88 करोड़ रुपये का कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड जारी किया गया है।" इसके अलावा, स्वयं सहायता समूहों ने 2022 से 2026 के बीच 631.76 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया है।
मंत्री ने बताया कि अब तक 58,000 स्वयं सहायता समूह कार्यशील हैं, जिनमें लगभग छह लाख ग्रामीण महिलाएं शामिल हैं। सरकार द्वारा 30,000 रुपये का रिवॉल्विंग फंड और 50,000 रुपये का कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "पीएसआरएलएम के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय सहायता के साथ-साथ प्रशिक्षण, बाजार तक पहुंच और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है। यह पहल न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ा रही है, बल्कि उनकी सामाजिक स्थिति में भी सुधार कर रही है।"