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पंजाब में अकाली दल और भाजपा के संभावित गठबंधन पर चर्चा तेज

पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के संभावित गठबंधन पर चर्चाएं फिर से तेज हो गई हैं। बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि लोग दोनों दलों को एक साथ देखना चाहते हैं, जबकि हरसिमरत कौर बादल ने भी संकेत दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात ने अटकलों को बढ़ावा दिया है। 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में गठबंधन टूटने के बाद, अब नए समीकरणों की संभावना बन रही है। जानें इस राजनीतिक हलचल के पीछे की पूरी कहानी।
 

पंजाब की राजनीति में हलचल


पंजाब की राजनीतिक स्थिति में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं फिर से गर्म हो गई हैं। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले, अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि पंजाब के लोग दोनों पुरानी पार्टियों को एक बार फिर एक साथ देखना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस गठबंधन का अंतिम निर्णय दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।


पंजाब की स्थिति पर मजीठिया की टिप्पणी

मजीठिया ने कहा कि पंजाब की वर्तमान स्थिति, सीमावर्ती राज्य के रूप में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका और सामाजिक सद्भाव को देखते हुए, लोगों में दोनों दलों के एक साथ आने की इच्छा है। उन्होंने यह भी बताया कि हरसिमरत कौर बादल ने हाल ही में जनता की भावनाओं को उजागर किया है। हालांकि, उन्होंने गठबंधन की संभावनाओं पर कोई अंतिम घोषणा नहीं की।


हरसिमरत के बयान से बढ़ी चर्चा

मजीठिया का यह बयान अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल के हालिया बयान के बाद आया है। संगरूर में एक कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने गठबंधन के संकेत देते हुए कहा कि वह अभी कुछ नहीं कहेंगी और आगे क्या होगा, यह जनता को खुद पता चलेगा। उन्होंने ऐसे समझौतों की आवश्यकता भी बताई, जो दिल्ली के सहयोग से पंजाब के विकास को गति दे सकें।


मोदी से मुलाकात ने बढ़ाई अटकलें

अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाल में हुई मुलाकात के बाद, दोनों दलों के बीच नजदीकी को लेकर राजनीतिक अटकलें बढ़ गई थीं। अब मजीठिया के बयान ने इन चर्चाओं को और भी बल दिया है। हालांकि, अभी तक दोनों पार्टियों की ओर से गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।


2020 में कृषि कानूनों पर टूटा था गठबंधन

अकाली दल और भाजपा का गठबंधन पंजाब की राजनीति में दो दशकों से अधिक समय तक प्रभावी रहा। दोनों ने 2007 से 2017 तक राज्य में गठबंधन सरकार चलाई। 2020 में केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने भाजपा से संबंध तोड़ लिया था। अब 2027 से पहले संभावित पुनर्गठबंधन ने नए राजनीतिक समीकरणों की संभावना को जन्म दिया है।


कांग्रेस पर भी मजीठिया का हमला

मजीठिया ने बातचीत के दौरान कांग्रेस को भी निशाने पर लिया। उन्होंने सज्जन कुमार के अंतिम संस्कार के मामले में कांग्रेस से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की और सवाल उठाया कि पंजाब कांग्रेस के नेता इस मामले में किस तरह की स्थिति अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि नेताओं का रुख पार्टी की सोच को स्पष्ट कर सकता है।