पंजाब में अपराध और आतंक के नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर
पंजाब में सुरक्षा चिंताएं बढ़ी
पंजाब में अपराध और आतंक से जुड़े संभावित नेटवर्क के प्रति सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं गहराई पकड़ रही हैं। जांच एजेंसियां शहजाद भट्टी के नेटवर्क को अपराध और आतंक के संगठित ढांचे के रूप में देख रही हैं। इस संदर्भ में, स्थानीय पुलिस के सहयोग से विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 44 संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है। एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क स्थानीय युवाओं और छोटे अपराधी समूहों को एक साथ लाकर काम कर रहा है। मामले की जांच लगातार जारी है।
सोशल मीडिया के माध्यम से नेटवर्क का विस्तार
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भट्टी कथित तौर पर सोशल मीडिया के जरिए स्थानीय युवाओं और अपराधियों से संपर्क करता है। 2025 में जालंधर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के घर पर हुए ग्रेनेड हमले की जांच में भी उसका नाम सामने आया था। नवंबर 2025 में गुरदासपुर पुलिस थाने के बाहर हुए ग्रेनेड हमले के मामले में उसके कथित मॉड्यूल से जुड़े तीन व्यक्तियों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
स्थानीय युवाओं का उपयोग
पुलिस के सूत्रों के अनुसार, भट्टी का नेटवर्क पारंपरिक गिरोह की तरह संगठित नहीं है। विभिन्न स्थानीय अपराधियों और युवाओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि कुछ व्यक्तियों को पहले पैसे दिए जाते हैं, जबकि अन्य को काम पूरा होने के बाद भुगतान किया जाता है। युवाओं को पहचान, धन और विदेश भेजने के लालच दिए जाने की भी जानकारी मिली है।
डिजिटल माध्यमों का उपयोग
एजेंसियां इस नेटवर्क में डिजिटल माध्यमों के उपयोग की भी जांच कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया और संदेश भेजने वाले प्लेटफार्मों के जरिए रेकी, सूचना एकत्रित करने, धमकी देने और हथियारों की आपूर्ति जैसे कार्य किए जाते थे। सुरक्षा एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि विभिन्न व्यक्तियों के बीच संपर्क कितना सीमित रखा गया है। कथित हमलों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया गया है।
गोल्डी बराड़ का नेटवर्क भी एक चुनौती
पंजाब पुलिस के सामने विदेश से संचालित अन्य कथित आपराधिक नेटवर्क भी एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इनमें गोल्डी बराड़ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। जनवरी 2026 में लुधियाना पुलिस ने उससे जुड़े वसूली और हथियार नेटवर्क के मामले में 10 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की चुनौती केवल स्थानीय आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेश में बैठे कथित संचालकों और उनके स्थानीय संपर्कों की पूरी श्रृंखला का पता लगाना भी है।