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पंजाब में कर्मचारियों और सरकार के बीच बढ़ता टकराव

पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव गहरा होता जा रहा है। कर्मचारियों ने महंगाई भत्ते के लिए उच्च न्यायालय के आदेश का पालन न करने पर सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। 7 सितंबर तक कार्रवाई संबंधी पत्र वापस न लेने पर सामूहिक छुट्टी की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, 'कर्मचारी विधानसभा' का आयोजन और किसान आंदोलन का समर्थन भी किया जाएगा। जानें इस संघर्ष की पूरी कहानी और इसके पीछे की वजहें।
 

चंडीगढ़ में टकराव की स्थिति


चंडीगढ़: पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार और विभिन्न कर्मचारी संगठनों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) देने के संबंध में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का निर्णय लिया है। दूसरी ओर, कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाने की योजना बनाई है। उनका कहना है कि यदि 7 सितंबर तक कर्मचारियों के खिलाफ जारी कार्रवाई संबंधी पत्र वापस नहीं लिया गया, तो वे 8 सितंबर से सामूहिक छुट्टी पर जाएंगे। इसके बाद मंत्रियों के आवासों का घेराव भी किया जाएगा।


कर्मचारी संगठनों की जीत

कर्मचारी संगठनों का दावा है कि उन्होंने DA से संबंधित मामले में उच्च न्यायालय की सिंगल और डबल बेंच दोनों स्तरों पर जीत हासिल की है। सरकार को 31 अगस्त तक उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करना था, लेकिन अब उसने इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय लिया है। इससे पहले से चल रहे कर्मचारी आंदोलन में और तेजी आने की संभावना है। संगठनों का कहना है कि सरकार का रुख टकराव वाला है।


7 सितंबर तक का अल्टीमेटम

लुधियाना में रविवार को हुई बैठक में कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 7 सितंबर तक कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित पत्र वापस लिया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो 8 सितंबर से सामूहिक छुट्टी पर जाने की तैयारी की जाएगी। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को पंजाब सरकार के मंत्रियों के आवासों का घेराव करने का कार्यक्रम भी घोषित किया गया है।


मुख्यमंत्री पर राजनीतिक दबाव

कर्मचारी संगठनों ने अपने आंदोलन को 'मुख्यमंत्री की चंडीगढ़ सचिवालय से गांव सतोज की वापसी' नाम दिया है। उनका कहना है कि यह अभियान मुख्यमंत्री भगवंत मान पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए चलाया जाएगा। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कर्मचारी नेताओं ने सरकार द्वारा जारी शो-कॉज नोटिस और कार्रवाई संबंधी पत्र पर भी नाराजगी व्यक्त की है।


कर्मचारी विधानसभा का आयोजन

संगठनों ने चंडीगढ़ में 'कर्मचारी विधानसभा' आयोजित करने की योजना बनाई है, जिसमें पंजाब के 117 विधायकों और 13 लोकसभा सांसदों को आमंत्रित किया जाएगा। नेताओं के अनुसार, जनप्रतिनिधियों के लिए कुर्सियां लगाई जाएंगी और उनसे कर्मचारियों तथा पेंशनरों की मांगों पर सवाल पूछे जाएंगे। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि उनकी कुल नौ प्रमुख मांगें हैं और बड़ी संख्या में कर्मचारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं। सरकार से पत्र वापस लेने की मांग भी दोहराई गई है।


किसान आंदोलन का समर्थन

कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चे से जुड़ी जत्थेबंदियों के चंडीगढ़ आंदोलन को समर्थन देने का निर्णय लिया है। यह मोर्चा 1 से 7 सितंबर तक विदेशी व्यापार समझौते के विरोध में चलेगा। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वे इस आंदोलन में भी शामिल होंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई अब केवल कर्मचारियों की मांगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह नीतिगत मुद्दों से भी जुड़ गई है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की है।