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पंजाब में नशे के खिलाफ शिक्षा का नया अभियान

पंजाब में नशे की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने शिक्षा को एक महत्वपूर्ण माध्यम बनाया है। एविडेंस-बेस्ड एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम के तहत छात्रों को नशे से दूर रहने के व्यवहारिक तरीके सिखाए जा रहे हैं। इस पहल में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो किशोरों में नशे के संकेत पहचानने और मार्गदर्शन देने के लिए प्रशिक्षित हैं। माइंडफुलनेस कार्यक्रम भी छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद कर रहा है। जानें इस अभियान के बारे में और कैसे यह पंजाब के भविष्य को सुरक्षित बनाने में सहायक हो सकता है।
 

नशे की समस्या से निपटने के लिए शिक्षा का सहारा

पंजाब सरकार ने नशे की समस्या से निपटने के लिए शिक्षा को एक प्रभावी माध्यम के रूप में चुना है। अब केवल पुलिस कार्रवाई या नशा मुक्ति केंद्रों पर निर्भर रहने के बजाय, स्कूलों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से छात्रों को जागरूक किया जा रहा है। राज्य में एक एविडेंस-बेस्ड एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम लागू किया गया है, जो विद्यार्थियों को सही निर्णय लेने और नशे से दूर रहने के व्यवहारिक तरीके सिखाता है। इस पहल में शिक्षकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है।


नए पाठ्यक्रम का विस्तार

स्कूलों में एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम की शुरुआत

पंजाब सरकार ने पिछले साल अगस्त में एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम की शुरुआत की थी। अब तक 3,658 सरकारी स्कूलों के लगभग 8 लाख छात्रों को इस कार्यक्रम से जोड़ा जा चुका है। लगभग 6,500 प्रशिक्षित शिक्षक नियमित रूप से इस पाठ्यक्रम का संचालन कर रहे हैं, जिसे वैज्ञानिक अनुसंधान और व्यवहार विशेषज्ञों के सहयोग से विकसित किया गया है।


शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका

शिक्षकों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

इस कार्यक्रम में शिक्षकों की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं है। उन्हें किशोरों में नशे के शुरुआती संकेतों को पहचानने, मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं को समझने और समय पर उचित मार्गदर्शन देने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। TISS के सहयोग से सीमावर्ती क्षेत्रों सहित नौ जिलों के 1,400 से अधिक स्कूल प्रमुखों को भी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।


व्यवहारिक कौशल पर ध्यान

नशे से बचने के व्यवहारिक कौशल सिखाए जा रहे हैं

पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नशे के दुष्प्रभावों को बताना नहीं है, बल्कि छात्रों को साथियों के दबाव का सामना करने, सही निर्णय लेने और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में नशे से दूर रहने के व्यवहारिक कौशल सिखाना है। इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने और सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।


कार्यशालाओं के सकारात्मक परिणाम

अमृतसर में शिक्षकों के लिए कार्यशालाएं

अमृतसर में कक्षा 9 से 12 तक के 3,000 से अधिक शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशालाएं आयोजित की गईं। प्रशिक्षण के बाद 75 प्रतिशत शिक्षकों ने बेहतर स्कूल वातावरण बनाने की प्रेरणा मिलने की बात कही। वहीं 85 प्रतिशत शिक्षकों ने माना कि किशोरों में नशे की समस्या का संबंध तनाव और सामाजिक दबाव से जुड़ा होता है।


माइंडफुलनेस कार्यक्रम का लाभ

माइंडफुलनेस से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ा

सरकार ने स्कूलों में माइंडफुलनेस कार्यक्रम भी शुरू किया है। कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए प्रतिदिन 30 मिनट के विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। मोहाली के 210 सरकारी स्कूलों में पायलट परियोजना के दौरान 83 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि इससे उनका तनाव कम हुआ और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविश्वास बढ़ा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि नशामुक्त युवा ही पंजाब के सुरक्षित भविष्य की सबसे मजबूत नींव हैं।