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पंजाब यूनिवर्सिटी में नई तकनीकी पाठ्यक्रमों की शुरुआत

पंजाब यूनिवर्सिटी ने छात्रों के लिए एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे आधुनिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत की योजना बनाई है। यह पहल छात्रों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार कौशल प्रदान करने के लिए है। कुलपति प्रोफेसर रेणु विज के अनुसार, यह कदम युवाओं के लिए नए करियर अवसरों के द्वार खोल सकता है। जानें इस नई शिक्षा नीति के तहत क्या-क्या प्रस्तावित किया गया है।
 

तकनीकी शिक्षा में नया मोड़

तकनीक के क्षेत्र में तेजी से हो रहे परिवर्तनों के साथ, रोजगार के नए अवसर भी उभर रहे हैं। इसी संदर्भ में, पंजाब यूनिवर्सिटी ने छात्रों के लिए आधुनिक और व्यावसायिक शिक्षा के नए रास्ते खोलने की योजना बनाई है। नए शैक्षणिक सत्र से, यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे विषयों के पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार कौशल प्रदान करना है।


नई शिक्षा नीति के तहत नए पाठ्यक्रम

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत बीएससी साइबर सिक्योरिटी, बीएससी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, तथा बीएससी डेटा साइंस जैसे पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव रखा गया है। प्रत्येक पाठ्यक्रम में 40 सीटें निर्धारित की गई हैं। हालांकि, इन पाठ्यक्रमों की शुरुआत संबंधित प्राधिकरणों और विश्वविद्यालय से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही होगी।


तकनीकी विशेषज्ञों की बढ़ती मांग

वर्तमान में, बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में डिजिटल तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इस कारण, एआई, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी में प्रशिक्षित युवाओं की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। यही कारण है कि इन क्षेत्रों को भविष्य के करियर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


व्यावहारिक ज्ञान पर जोर

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इन पाठ्यक्रमों में केवल थ्योरी पर ध्यान नहीं दिया जाएगा। छात्रों को उद्योग से संबंधित कौशल, डेटा विश्लेषण, साइबर सुरक्षा और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा, ताकि वे नौकरी के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।


छात्रों के लिए नए अवसर

कुलपति प्रोफेसर रेणु विज के अनुसार, पूरी योजना तैयार कर ली गई है। इन पाठ्यक्रमों की शुरुआत से छात्रों को आधुनिक विषयों की पढ़ाई के लिए अन्य राज्यों या निजी संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल युवाओं के लिए नए करियर अवसरों के द्वार खोल सकती है।