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पंजाब सरकार का नया कानून: निजी स्कूलों की फीस पर सख्त नियंत्रण

पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करने के लिए एक नया कानून लागू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि स्कूल अब मनमर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे और निर्धारित सीमा से अधिक वसूली करने पर अभिभावकों को पैसा लौटाना होगा। इस कानून के तहत फीस वृद्धि पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और अनिवार्य भुगतान को भी फीस माना जाएगा। इसके अलावा, पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया जाएगा। जानें इस नए कानून के तहत और क्या बदलाव होंगे।
 

पंजाब में निजी स्कूलों की फीस पर नया नियम


पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की फीस को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की है कि अब स्कूल अपनी मर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। यदि स्कूल निर्धारित सीमा से अधिक फीस लेते हैं, तो उन्हें अभिभावकों को पैसा वापस करना होगा। इसके लिए एक नया फीस रेगुलेशन कानून लागू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।


फीस वृद्धि पर कड़ी निगरानी

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में जिन निजी स्कूलों ने 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, उन्हें एक महीने के भीतर अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को लौटानी होगी। इस कार्य के लिए हर जिले में उपायुक्त (डीसी) की अध्यक्षता में एक फीस रेगुलेटरी कमेटी का गठन किया जाएगा। यह कमेटी स्कूलों के वित्तीय दस्तावेजों की जांच करेगी। सरकार का कहना है कि यह कदम लगभग 7,800 निजी स्कूलों और 32 लाख विद्यार्थियों के परिवारों को राहत देने के लिए उठाया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर पहले बार 50 हजार रुपये, दूसरी बार एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, और तीसरी बार स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।


अनिवार्य भुगतान को फीस माना जाएगा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि स्कूल किसी भी नाम से अभिभावकों से अनिवार्य भुगतान लेते हैं, तो उसे फीस के रूप में माना जाएगा। केवल स्वैच्छिक गतिविधियों के लिए लिया गया शुल्क, जैसे शैक्षणिक टूर, इस नियम में शामिल नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कई निजी स्कूल ट्यूशन फीस को कम दिखाकर अन्य मदों के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूलते हैं। ऐसे मामलों की फोरेंसिक ऑडिट कराई जाएगी। यदि अधिक वसूली साबित होती है, तो स्कूलों को सीधे अभिभावकों के बैंक खातों में पैसा लौटाना होगा।


पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन पोर्टल

सरकार जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने जा रही है, जहां सभी निजी स्कूलों को अपनी मौजूदा फीस, पिछले वर्षों की फीस और फीस वृद्धि का पूरा रिकॉर्ड अपलोड करना होगा। फीस रेगुलेटरी कमेटी आवश्यकता पड़ने पर पुराने रिकॉर्ड की भी जांच करेगी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के विद्यार्थियों से जुड़े नियमों की समीक्षा करेगी। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि कई परिवार अधिक फीस के कारण अपने बच्चों की पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। नए कानून का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना, निजी स्कूलों की मनमानी को रोकना और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करना है।