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पंजाब सरकार ने फैटी लिवर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की

पंजाब सरकार ने विश्व फैटी लिवर दिवस पर इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अभियान शुरू किया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि फैटी लिवर एक 'साइलेंट महामारी' बनती जा रही है, जिससे समय पर पहचान न होने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जानें इस बीमारी के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय।
 

फैटी लिवर दिवस पर जागरूकता अभियान


चंडीगढ़: विश्व फैटी लिवर दिवस के अवसर पर, पंजाब सरकार ने लोगों से इस गंभीर लेकिन अक्सर अनदेखी बीमारी के प्रति जागरूक रहने की अपील की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि फैटी लिवर अब एक 'साइलेंट महामारी' बनती जा रही है, क्योंकि इसके प्रारंभिक चरण में मरीजों को कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। इस कारण, कई लोग समय पर इसकी पहचान नहीं कर पाते और बाद में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


फैटी लिवर के गंभीर परिणाम

स्वास्थ्य मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि फैटी लिवर का समय पर पता नहीं लगाया गया और उचित उपचार नहीं किया गया, तो यह लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर फेल होने जैसी गंभीर स्थितियों का कारण बन सकता है। उन्होंने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।


मुख्यमंत्री सेहत योजना का लाभ

मुख्यमंत्री सेहत योजना का कैसे मिल रहा लोगों का लाभ?


डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के माध्यम से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रही है। इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। योजना में 2300 से अधिक उपचार प्रक्रियाएं और विभिन्न बीमारियों के पैकेज शामिल हैं। इसके माध्यम से मरीज सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में बिना आर्थिक बोझ के इलाज करा सकते हैं।


लिवर से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता प्रभाव

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच महीनों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत लिवर से जुड़ी 302 बीमारियों का इलाज किया गया है। इनमें तीव्र वायरल हेपेटाइटिस, क्रॉनिक हेपेटाइटिस और लिवर एब्सेस जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्य में लिवर संबंधी बीमारियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।


फैटी लिवर के कारण

क्या है इस बीमारी का प्रमुख कारण?


पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलरी साइंसेज (पीआईएलबीएस) के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि फैटी लिवर की समस्या अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवा वर्ग और बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मधुमेह, मोटापा और शराब का सेवन इस बीमारी के प्रमुख कारण हैं।


फैटी लिवर से बचाव के उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार के जरिए फैटी लिवर की समस्या को काफी हद तक रोका और नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टरों ने मोटापा, मधुमेह, मेटाबॉलिक सिंड्रोम या लिवर रोग के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को नियमित लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और फाइब्रोस्कैन कराने की सलाह दी है। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और शराब से दूरी को इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय बताया गया है।