पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन जोड़े की सुरक्षा के लिए निगरानी के आदेश दिए
हाईकोर्ट का एहतियाती कदम
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक लिव-इन जोड़े की सुरक्षा को लेकर एहतियाती कदम उठाया है, जिन्होंने अपनी जान और स्वतंत्रता को खतरे में बताकर सुरक्षा की मांग की थी। न्यायमूर्ति आलोक जैन ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वे दोनों की नियमित निगरानी करें। यह व्यवस्था कम से कम तीन महीने तक प्रभावी रहेगी। कोर्ट ने जोड़े को हर 15 दिन में संबंधित थाना प्रभारी के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, उन्हें अपने मोबाइल नंबर चालू रखने और वर्तमान पता पुलिस को बताने का भी निर्देश दिया गया है।
सुरक्षा के लिए पुलिस निगरानी
अदालत ने जोड़े की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस को निगरानी के आदेश दिए हैं। दोनों को हर 15 दिन में संबंधित थाना प्रभारी के सामने उपस्थित होना होगा। इसके अलावा, उन्हें अपने मोबाइल नंबर को सक्रिय रखना होगा और मौजूदा पता भी पुलिस को उपलब्ध कराना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह निगरानी व्यवस्था कम से कम तीन महीने तक जारी रहेगी।
महिला की स्थिति पर चिंता
सुनवाई के दौरान, अदालत ने महिला की स्थिति को भी ध्यान में रखा। कोर्ट ने कहा कि महिला अपने साथी की पृष्ठभूमि से पूरी तरह से परिचित नहीं है। इससे पहले, 11 सितंबर को जारी आदेश के बाद, दोनों अदालत में पेश हुए थे। न्यायमूर्ति आलोक जैन ने उनसे बातचीत की और उनकी स्थिति को समझने का प्रयास किया।
माता-पिता से संवाद का निर्देश
जोड़े की कम उम्र को देखते हुए, अदालत ने महिला को अपने माता-पिता से हर दिन बातचीत करने का निर्देश दिया। उसे अपनी कुशलक्षेम की जानकारी परिवार को देते रहना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि माता-पिता को किसी प्रकार की चिंता होती है, तो वे तुरंत संबंधित थाना प्रभारी को सूचित कर सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थिति पर नजर बनाए रखना है।
पुलिस जांच में खतरे का अभाव
सुनवाई के दौरान, पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि जोड़े ने 25 अगस्त को सुरक्षा की मांग के लिए पुलिस को आवेदन दिया था। पुलिस ने इसकी जांच की और महिला के माता-पिता के बयान भी दर्ज किए। पुलिस के अनुसार, जांच में किसी प्रकार का खतरा सामने नहीं आया। हालांकि, जोड़े की कम उम्र और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए, हाईकोर्ट ने एहतियात के तौर पर निगरानी जारी रखने का निर्णय लिया।