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पंजाब हाई कोर्ट ने सिंचाई विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया पर लगाई रोक

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियरों की पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। यह निर्णय पदोन्नति कोटे के विवाद के चलते लिया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि विभाग ने विभिन्न इंजीनियरिंग संवर्गों के लिए निर्धारित कोटे का सही पालन नहीं किया। अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी, जहां पदोन्नति कोटे और विभागीय प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।
 

चंडीगढ़ में हाई कोर्ट का निर्णय


चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियरों की सब-डिविजनल इंजीनियर के पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है। अदालत ने विभागीय पदोन्नति समिति की प्रस्तावित बैठक को अगली सुनवाई तक स्थगित करने का आदेश दिया है। यह निर्णय पदोन्नति कोटे को लेकर उठे विवाद के बीच आया है।


याचिका का विवरण

जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने यह अंतरिम आदेश सिंचाई विभाग में कार्यरत विद्युत अभियंता चंदन गर्ग द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि विभाग विभिन्न इंजीनियरिंग संवर्गों के लिए निर्धारित पदोन्नति कोटे का सही तरीके से पालन नहीं कर रहा है। उनका कहना है कि कुछ संवर्गों को निर्धारित हिस्से से अधिक पदोन्नति का लाभ दिया गया है, जबकि विद्युत संवर्ग के अधिकारियों के साथ समान व्यवहार नहीं किया गया।


याचिका में उठाए गए मुद्दे

याचिका में यह भी कहा गया कि विभाग में सिविल और मैकेनिकल संवर्ग के अधिकारियों को पहले ही अपेक्षा से अधिक पदोन्नतियां मिल चुकी हैं। दूसरी ओर, विद्युत संवर्ग के लिए निर्धारित पदों का पूरा उपयोग नहीं किया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार विद्युत अभियंताओं के लिए निर्धारित 12 पदों में से केवल चार पद ही भरे गए हैं, जिससे इस संवर्ग के अधिकारियों के साथ अन्याय हुआ है।


अदालत की सुनवाई और तर्क

अदालत को यह भी बताया गया कि पदोन्नति के मानदंड और विभिन्न संवर्गों के लिए निर्धारित कोटे से जुड़ा विवाद पहले से ही उच्च न्यायालय में लंबित है। इस मामले की सुनवाई 24 जुलाई को निर्धारित है। इसके बावजूद विभाग द्वारा डीपीसी बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया, जिससे विवादित परिस्थितियों में पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना बन गई थी।


याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि यदि विवाद के अंतिम निर्णय से पहले पदोन्नतियां दे दी जाती हैं, तो विद्युत संवर्ग के अधिकारियों को अपूरणीय क्षति हो सकती है। साथ ही बाद में स्थिति को सुधारना भी कठिन हो जाएगा। उन्होंने इसे समान अवसर और निष्पक्ष प्रशासनिक प्रक्रिया के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया।


अगली सुनवाई की तिथि

दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने माना कि लंबित न्यायिक विवाद के दौरान डीपीसी बैठक आयोजित करने से मामला और जटिल हो सकता है। इसलिए अदालत ने एहतियात के तौर पर बैठक को अगली सुनवाई तक स्थगित रखने का निर्देश दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। उस दिन अदालत पदोन्नति कोटे, विभिन्न संवर्गों के अधिकारों और विभागीय प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर आगे विचार करेगी। तब तक पंजाब सिंचाई विभाग में जेई से एसडीई पदोन्नति की प्रक्रिया रुकी रहेगी।