बठिंडा के वरिष्ठ नागरिकों की समाजसेवा की प्रेरणादायक कहानी
बठिंडा में समाजसेवा का अनोखा उदाहरण
बठिंडा: आज के युग में जब अधिकांश लोग रिटायरमेंट के बाद आरामदायक जीवन जीना पसंद करते हैं, वहीं बठिंडा जिले के रामपुरा फूल के पांच वरिष्ठ नागरिकों ने समाज सेवा का एक अनूठा रास्ता अपनाया है। ये सभी पिछले दस वर्षों से संत त्रिवेणी गिरी पुनर्ज्योति आई अस्पताल में बिना किसी आर्थिक लाभ के सेवा कर रहे हैं। उनकी यह पहल न केवल मरीजों के लिए सहारा बनी है, बल्कि समाज में सेवा और समर्पण का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।
सेवानिवृत्ति के बाद सेवा का सफर
इस सेवा की शुरुआत 2014 में हुई थी। रामपुरा फूल के पूर्व मंडी सुपरवाइजर मिलवर्तन भंडारी ने अस्पताल में मरीजों की समस्याओं को करीब से देखा। अस्पताल में सीमित स्टाफ के कारण कई मरीजों को समय पर सहायता नहीं मिल पाती थी। विशेषकर बुजुर्ग मरीजों को पंजीकरण, जांच कक्ष तक पहुंचने और अन्य प्रक्रियाओं में कठिनाई होती थी। इन समस्याओं को देखते हुए भंडारी ने अपने कुछ सेवानिवृत्त साथियों के साथ मिलकर अस्पताल में नियमित सेवा देने का निर्णय लिया। धीरे-धीरे यह प्रयास एक संगठित स्वयंसेवी व्यवस्था में बदल गया, जो आज भी निरंतर जारी है।
मरीजों की हर आवश्यकता में सहायक
इन स्वयंसेवकों की भूमिका अस्पताल में केवल दिशा बताने तक सीमित नहीं है। वे मरीजों की पर्ची बनवाने, उन्हें संबंधित विभागों तक पहुंचाने और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। इसके अलावा, असहाय और वृद्ध मरीजों को विशेष सहयोग दिया जाता है ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। अस्पताल में भीड़ बढ़ने पर व्यवस्था बनाए रखने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मरीज और उनके परिजन भी इन बुजुर्गों की सेवाओं की सराहना करते हैं, क्योंकि उनकी सहायता से अस्पताल की प्रक्रियाएं अधिक सरल और सुगम बन जाती हैं।
समाजसेवा को आगे बढ़ाने की योजना
इन पांचों वरिष्ठ नागरिकों का मानना है कि सेवा का कोई निश्चित समय नहीं होता। उनका उद्देश्य भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ना है। वे गांवों में नेत्र जांच शिविरों के आयोजन और जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत बनाने की योजना पर भी काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समाज के अधिक लोग स्वयंसेवा के लिए आगे आएं, तो जरूरतमंदों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं। उनकी यह सोच साबित करती है कि सेवानिवृत्ति जीवन का अंत नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ नया करने की शुरुआत हो सकती है।