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भाखड़ा डैम का जलस्तर बढ़ने से पंजाब में चिंता

पंजाब में भाखड़ा डैम का जलस्तर बढ़ने से चिंता का माहौल है। हिमाचल प्रदेश में तापमान में वृद्धि के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे जल प्रवाह में वृद्धि हो रही है। प्रशासन ने राज्यों को अधिक पानी उपयोग करने की सलाह दी है ताकि मानसून के लिए जगह बनाई जा सके। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और प्रशासन की तैयारी के बारे में।
 

भाखड़ा डैम की स्थिति


चंडीगढ़: पंजाब में मानसून की शुरुआत अभी कुछ हफ्तों दूर है, लेकिन भाखड़ा डैम का बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण बन गया है। हिमाचल प्रदेश में तापमान में वृद्धि के चलते ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे सतलुज और उसकी सहायक नदियों में जल प्रवाह बढ़ गया है। इसका प्रभाव भाखड़ा डैम पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को अपने हिस्से से अधिक पानी लेने की सलाह दी है।


जलस्तर की वर्तमान स्थिति

भाखड़ा डैम की अधिकतम जल क्षमता 1680 फीट है, जबकि वर्तमान में इसका जलस्तर 1578.07 फीट तक पहुंच चुका है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 21 फीट अधिक है। अधिकारियों का मानना है कि पहाड़ों में बर्फ के पिघलने और नदियों में बढ़ते प्रवाह के कारण जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है।


मानसून से पहले की तैयारी

मानसून से पहले खाली करनी होगी जगह


हिमाचल प्रदेश में जून के अंत तक मानसून सक्रिय हो जाता है और जुलाई की शुरुआत में पंजाब पहुंचता है। बारिश के दौरान नदियों में जल प्रवाह कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए गोविंद सागर झील में अतिरिक्त पानी को संग्रहित करने के लिए पर्याप्त जगह बनाना आवश्यक है। इसी कारण BBMB ने समय पर कदम उठाने की योजना बनाई है।


राज्यों को पानी का उपयोग बढ़ाने की सलाह

राज्यों को पानी उपयोग बढ़ाने की सलाह


चंडीगढ़ में BBMB के मुख्यालय में आयोजित तकनीकी समिति की बैठक में सिंचाई, जल प्रबंधन और डैम की स्थिति पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने सुझाव दिया कि धान की फसल के मौसम में पंजाब और हरियाणा नहरों के माध्यम से अधिक पानी का उपयोग करें। इससे डैम से अतिरिक्त पानी छोड़ा जा सकेगा और मानसून के लिए जगह बनाई जा सकेगी।


पानी के बंटवारे की व्यवस्था

पानी के बंटवारे का तय है सिस्टम


BBMB हर वर्ष विभिन्न राज्यों के लिए जल आवंटन निर्धारित करता है। निर्धारित हिस्सेदारी के अनुसार पंजाब को 5.512 MAF, हरियाणा को 2.987 MAF और राजस्थान को 3.318 MAF पानी मिलता है। यह वितरण चक्र हर साल 21 मई से शुरू होकर अगले वर्ष 20 मई तक चलता है। जल प्रबंधन इसी तय व्यवस्था के तहत संचालित किया जाता है।


पिछले साल की बाढ़ से मिली सीख

पिछले साल की बाढ़ से मिला सबक


पंजाब ने पिछले वर्ष गंभीर बाढ़ का सामना किया था। वर्ष 1987 के बाद पहली बार कई जिलों में स्थिति इतनी खराब हुई कि राज्य सरकार को आपदा घोषित करनी पड़ी थी। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन और जल प्रबंधन एजेंसियां पहले से सतर्क हैं। उनका उद्देश्य संभावित खतरे को समय पर कम करना है।