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सुखना झील के गाद हटाने का कार्य तेजी से प्रगति पर

सुखना झील की जल क्षमता को बढ़ाने के लिए गाद हटाने का कार्य तेजी से प्रगति पर है। इस परियोजना का 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जिससे झील में अधिक पानी जमा हो सकेगा। यह कार्य आईआईटी रुड़की और WWF की सलाह पर किया जा रहा है। झील का महत्व और इसके आसपास के वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षण के लिए नई योजनाएं भी बनाई गई हैं। जानें इस परियोजना के बारे में और अधिक जानकारी।
 

सुखना झील की जल क्षमता को बढ़ाने की दिशा में कदम

चंडीगढ़: सुखना झील की सुंदरता और जल भंडारण क्षमता को बनाए रखने के लिए गाद हटाने का कार्य तेजी से चल रहा है। रेगुलेटरी एंड से 34,000 घनमीटर गाद हटाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है, जिससे झील में अधिक पानी जमा हो सकेगा और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।


सुखना झील को मानसून से पहले मिली नई जान

यूटी इंजीनियरिंग विभाग के मुख्य अभियंता सीबी ओझा ने बताया कि इस परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य अब तक पूरा हो चुका है। यह कार्य आईआईटी रुड़की, विश्व वन्यजीव कोष (WWF) और वन विभाग की सलाह पर एक महीने पहले शुरू किया गया था। मानसून के आगमन तक यह कार्य जारी रहेगा।


कार्य की प्रक्रिया

रेगुलेटरी एंड पर 351 मीटर गहराई तक खुदाई की जा रही है। निकाली गई मिट्टी का उपयोग झील के किनारों और पैदल रास्तों को मजबूत करने में किया जा रहा है। समय पर कार्य पूरा करने के लिए चार चेन-माउंटेड एक्सकेवेटर, जेसीबी मशीनें और कई टिप्पर लगाए गए हैं।


झील का महत्व

सुखना झील लगभग 565 एकड़ में फैली हुई है और इसका कैचमेंट एरिया लगभग 10,395 एकड़ है। इसे वर्ष 1988 में राष्ट्रीय वेटलैंड के रूप में मान्यता प्राप्त हुई थी। झील के आसपास सुखना वन्यजीव अभयारण्य भी स्थित है। नई योजना में जल स्तर बनाए रखना, जलीय जीवों का संरक्षण, झील की सफाई, और पर्यटकों के लिए सुविधाओं में सुधार शामिल हैं।