हरिके वन्यजीव सेंचुरी में डॉल्फिन संरक्षण के लिए पंजाब सरकार का नया कदम
हरिके वन्यजीव सेंचुरी में संरक्षण की नई पहल
पंजाब की हरिके वन्यजीव सेंचुरी में सिंधु नदी डॉल्फिन के संरक्षण और वेटलैंड के विकास के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पंजाब सरकार ने इस दिशा में 57 करोड़ रुपये की एक विशेष परियोजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजा है। इसके साथ ही, हरिके सेंचुरी के समग्र विकास के लिए 30.44 करोड़ रुपये की एकीकृत प्रबंधन परियोजना भी तैयार की गई है।
प्रस्तावों की समयसीमा
इन दोनों प्रस्तावों को जुलाई और अगस्त 2026 में केंद्र सरकार को भेजा गया है। विधानसभा में खडूर साहिब के विधायक मनजिंदर सिंह लापुरा के सवाल के लिखित जवाब में वन एवं वन्यजीव मंत्री लाल चंद कटारूचक ने यह जानकारी साझा की।
दस साल का प्रबंधन योजना
सरकार के अनुसार, हरिके वन्यजीव अभयारण्य के लिए 2020 से 2030 तक का एक दस साल का प्रबंधन योजना लागू है। इस योजना के तहत लगभग 42.53 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। इसमें हरिके की जैव विविधता को सुरक्षित रखने, वेटलैंड का संरक्षण, इको टूरिज्म को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों की भागीदारी को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
चार साल में खर्च की गई राशि
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2022 से 31 जुलाई 2026 तक हरिके सेंचुरी के संरक्षण और विकास पर लगभग 4.97 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस दौरान पौधारोपण, जलकुंभी और अन्य खरपतवारों को हटाने, गश्त के लिए मोटर बोट खरीदने, नए चेक पोस्ट बनाने और सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने जैसे कार्य किए गए हैं। इसके अलावा, इंटरप्रिटेशन सेंटर को आधुनिक बनाने, बाउंड्री वॉल बनाने, घास के मैदान विकसित करने और घायल वन्यजीवों के बचाव की व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।
प्रवासी पक्षियों का महत्वपूर्ण ठिकाना
हरिके सेंचुरी केवल सिंधु नदी डॉल्फिन के लिए ही नहीं, बल्कि प्रवासी पक्षियों के लिए भी एक प्रमुख ठिकाना है। यहां हर साल प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की गणना की जाती है। वर्ष 2022 में यहां 56,142 पक्षियों और 80 प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। 2023 में यह संख्या बढ़कर 65,624 पक्षियों और 85 प्रजातियों तक पहुंच गई। 2024 में 50,529 पक्षियों और 81 प्रजातियों का रिकॉर्ड मिला, जबकि 2025 में 57,292 पक्षियों की 97 प्रजातियां दर्ज की गईं। 2026 में 52,707 पक्षियों की 87 प्रजातियां रिकॉर्ड की गईं।
पानी की गुणवत्ता की जांच
अप्रैल 2026 में हरिके के पानी की गुणवत्ता की दो बार जांच की गई। जांच में सेंचुरी के अंदर पानी की गुणवत्ता मानकों के अनुसार पाई गई। हालांकि, सतलुज नदी के माध्यम से बाहर से प्रदूषित पानी आने की समस्या सामने आई। इसके बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। पानी की गुणवत्ता सिंधु डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए प्रदूषण नियंत्रण को संरक्षण योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।