Raghav Chadha का अनोखा प्रयोग: डिलीवरी पार्टनर बनकर समझी गिग वर्कर्स की समस्याएं
नई दिल्ली में राघव चड्ढा का अनोखा अनुभव
नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा इन दिनों एक अनोखे प्रयोग के कारण चर्चा में हैं। इस बार उनकी वजह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक वास्तविक अनुभव है। उन्होंने कुछ समय के लिए खुद को एक Blinkit डिलीवरी पार्टनर के रूप में स्थापित किया, जो कि आमतौर पर नेताओं से नहीं देखा जाता है।
सोशल मीडिया पर साझा किया अनुभव
सोशल मीडिया पर शेयर किया अनुभव
राघव चड्ढा ने इस अनुभव का एक वीडियो अपने X अकाउंट पर साझा किया। उन्होंने लिखा कि वे कॉरपोरेट मीटिंग्स से बाहर निकलकर असली हालात को समझना चाहते हैं। वीडियो में वे Blinkit की पीली यूनिफॉर्म पहने, कंधे पर डिलीवरी बैग लटकाए और एक अन्य राइडर के साथ स्कूटी पर ऑर्डर डिलीवर करते हुए नजर आते हैं।
डिलीवरी पार्टनर की भूमिका क्यों चुनी?
क्यों चुना डिलीवरी पार्टनर की भूमिका
वीडियो के अंत में, राघव चड्ढा एक अपार्टमेंट के दरवाजे पर डिलीवरी करते हुए दिखाई देते हैं। यह वीडियो उस समय आया है जब वे गिग इकॉनमी में काम करने वाले लोगों की स्थिति को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने पहले भी गिग वर्कर्स की कठिनाइयों और असमानताओं के बारे में सोशल मीडिया पर लिखा है।
सरकार का नया कदम गिग वर्कर्स के लिए
गिग वर्कर्स पर सरकार का नया कदम
इस बीच, सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। 30 दिसंबर 2025 को कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020 के तहत नए ड्राफ्ट नियम जारी किए गए हैं, जिनका उद्देश्य इन कामगारों को औपचारिक पहचान और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। राघव चड्ढा ने इन नियमों का स्वागत करते हुए कहा कि यह करोड़ों डिलीवरी पार्टनर्स और फ्रीलांस वर्कर्स के लिए एक सकारात्मक शुरुआत है।
गिग वर्कर्स की समस्याएं
“अब तक नजरअंदाज होती रही हैं समस्याएं”
चड्ढा का मानना है कि लंबे समय तक कई प्लेटफॉर्म कंपनियां गिग वर्कर्स की समस्याओं को नजरअंदाज करती रही हैं। नए नियमों से उम्मीद है कि भविष्य में इन कामगारों को बीमा, पेंशन, हेल्थ कवर और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं।
डिलीवरी पार्टनर के साथ बातचीत
डिलीवरी पार्टनर को घर बुलाकर की बातचीत
राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को समझने के लिए एक डिलीवरी पार्टनर को अपने घर लंच पर बुलाया। यह मुलाकात अनौपचारिक थी, जहां दोनों ने साथ बैठकर खाना खाया और खुलकर बातचीत की।
गिग वर्कर की रोजमर्रा की चुनौतियां
गिग वर्कर की रोजमर्रा की चुनौतियां
इस बातचीत में डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि उन्हें लंबे समय तक काम करना पड़ता है और रोज की कमाई निश्चित नहीं होती। एल्गोरिदम आधारित टारगेट पूरे करने का दबाव बना रहता है। टारगेट पूरे न होने पर इंसेंटिव कट जाता है और कभी-कभी अकाउंट सस्पेंड होने का खतरा भी रहता है।
नीति को समझने की कोशिश
नीति को जमीन पर समझने की कोशिश
राघव चड्ढा ने इन समस्याओं को गंभीरता से सुना और माना कि गिग वर्कर्स की भूमिका देश की अर्थव्यवस्था में तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनकी सुरक्षा अब भी कमजोर है।
लोगों ने इस कदम को सराहा है
Blinkit डिलीवरी एजेंट बनकर काम करना और सीधे एक वर्कर से संवाद करना, चड्ढा की सोच का हिस्सा है। सोशल मीडिया पर उनके इस कदम को कई लोगों ने सराहा है और इसे जमीनी हकीकत से जुड़ने की एक सकारात्मक पहल बताया है।