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कोटा में सांपों के घुसने से दहशत, रेस्क्यू टीम ने बचाया

कोटा में बारिश के मौसम के दौरान सांपों के घरों में घुसने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई। एक घर में जहरीला ब्लैक कोबरा और दूसरे में आठ फीट लंबा अजगर पाया गया। स्नेक रेस्क्यू टीम ने दोनों सांपों को सुरक्षित रूप से पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। जानें इस घटना के बारे में और वन्यजीव विशेषज्ञों की सलाह क्या है।
 

कोटा में सांपों की घुसपैठ


कोटा: राजस्थान के कोटा में बारिश के मौसम के दौरान दो अलग-अलग स्थानों पर सांपों के घरों में घुसने की घटनाओं ने स्थानीय निवासियों में भय पैदा कर दिया है। एक घर की रसोई में एक जहरीला ब्लैक कोबरा पाया गया, जबकि दूसरे घर के आंगन में लगभग आठ फीट लंबा अजगर देखा गया। इन दोनों मामलों में परिवारों ने तुरंत स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचित किया, जिसके बाद सांपों को सुरक्षित रूप से पकड़कर जंगल में छोड़ दिया गया।


पहली घटना का विवरण

पहली घटना कोटा के नयागांव रोजड़ी क्षेत्र की है। यहां फूल सिंह कुशवाहा के घर में देर रात एक चार फीट लंबा ब्लैक कोबरा घुस आया। सुबह जब परिवार के सदस्य जागे, तो उन्होंने देखा कि सांप उनके पैरों के पास सरक रहा है। सांप तेजी से रसोई में पहुंचा और गैस चूल्हे के पास रखे रोटी के चकले के पीछे छिप गया। सांप को देखकर परिवार के लोग घबरा गए और सुरक्षित स्थान पर जाकर स्नेक कैचर गोविंद शर्मा को बुलाया।


रेस्क्यू की प्रक्रिया

रेस्क्यू का कार्यवाही


सूचना मिलने पर स्नेक कैचर ने सावधानी से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। थोड़ी देर की खोज के बाद, ब्लैक कोबरा चकले के पीछे छिपा मिला। उसे बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रूप से पकड़ा गया और वन विभाग को सूचित करने के बाद जंगल में छोड़ दिया गया।


दूसरी घटना का विवरण

दूसरी घटना की जानकारी


दूसरी घटना दादाबाड़ी विस्तार योजना क्षेत्र में हुई। सुबह लगभग साढ़े पांच बजे, परिवार के लोग उठे और देखा कि उनके आंगन में एक लगभग आठ फीट लंबा अजगर घूम रहा है। अजगर को देखकर सभी सदस्य घबरा गए और तुरंत घर से बाहर निकल गए। स्नेक कैचर गोविंद शर्मा को बुलाया गया, जिन्होंने सुरक्षित तरीके से अजगर का रेस्क्यू किया और वन विभाग को सूचित करके उसे लाडपुरा के जंगल में छोड़ दिया।


विशेषज्ञों की राय

वन्यजीव विशेषज्ञों की सलाह


वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में सांपों के बिलों और प्राकृतिक ठिकानों में पानी भर जाने के कारण वे सुरक्षित स्थान की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर आ जाते हैं। ऐसे समय में लोगों को घबराने या सांपों को मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।